Chhattisgarh Korba

चेहरे पर मुस्कान लाने का अभियान लोक सुराज

कोरबा: जिले के जंगलों से घिरे सुदूर आदिवासी इलाके अजगरबहार के शिविर में केराकछार के श्री आयतन सिंह राठिया को लोक सुराज शिविर में जब मछली जाल, बर्फ पेटी और तराजू मिले तो उसकी आंखें खुशी से छलछला गईं।

मछली पालन आयतन का पुश्तैनी काम है, पर उसे ज्यादा मछलियां पकड़ने में दिक्कत होती थी और पकड़े जाने के बाद सही कीमत मिलते तक उन्हें सहेजकर कर रखने की भी समस्या थी। नतीजतन मछलियां निकलते ही बाजार में किसी भी कीमत में बेच देने की मजबूरी के चलते श्रम और समय के अनुरूप उनकी आमदनी बहुत कम थी। फरवरी माह में लोक सुराज अभियान के प्रथम चरण में उनके गांव में शिविर लगाया गया था, जहां उसने शासन की योजना के तहत मछली जाल, आईस बॉक्स और तराजू-बाट देने के लिए आवेदन लगाया। लोक सुराज के तीसरे चरण समाधान शिविर में आयतन को सरकारी योजना के तहत करीब 16 हजार की उपरोक्त सामग्री अनुदान पर निःशुल्क मिल गई। आयतन का कहना है कि अब वह हर दिन ज्यादा मछलियां पकड़ लेगा, पकड़ी गई मछलियों को बर्फ पेटी में संभालकर रख सकेगा, अच्छी कीमत मिलने पर ही उन्हें बेचेगा। इसी जिले के कोरई ग्राम के कोरवा जनजाति के समार साय को भी बहुत दिनों से मछली जाल की जरूरत थी। उसने आवेदन लगाया और उसकी मांग पूरी हो गई।

प्रदेश भर में चल रहे लोक सुराज अभियान में लगातार छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का कहना है कि लोक सुराज ‘सोशल ऑडिट’ का सबसे बढ़िया तरीका है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि आवेदनों का निराकरण सिर्फ रिकॉर्ड में नहीं, धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। लोक सुराज अभियान अंतिम पंक्ति तक पहुंचने का सबसे अच्छा माध्यम हो चुका है। सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाएं हर वर्ग के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए तत्पर दिखाई देती है।

दानीटोला वार्ड, धमतरी जिला मुख्यालय का एक हिस्सा। यहां की कलावती चक्रधारी अपने पति के साथ दिहाड़ी मजदूरी करती है। दोनों थक हार कर घर आते थे। भोजन पकाने के लिए धुएं से भरे ईंधन की व्यवस्था करना हर दिन का जरूरी काम था। उसे समाधान शिविर में उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिल गया। अब उसका समय काफी बचेगा, जिसका उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सकेगी। धुएं से आंखें लाल नहीं होगी और उससे होने वाली बीमारियों की चिंता भी हट गई। उज्ज्वला योजना ने कबीरधाम जिले की ईश्वरी के घर में भी खुशहाली ला दी है। इस जिले के सहसपुर-लोहारा ब्लॉक के छोटे से गांव दिशाटोला की ईश्वरी ने फरवरी में आवेदन लगाया था, उसे कनेक्शन मिल गया। इसी गांव की चंद्रिका को भी इस योजना का लाभ मिला।

मालूम हो कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केन्द्र व प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजना है। यह महिलाओं की आजादी, धुएं और बीमारी से मुक्ति व पर्यावरण सुरक्षा का अभियान है। प्रदेशभर में 25 लाख परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। इस योजना ने जंगलों के अरबों रुपए के पेड़ बचाए हैं और आगे भी बचाए जाएंगे।
लोक सुराज अभियान के तीसरे चरण में अनेक ऐसी समस्याओं का भी समाधान किया जा रहा है, जिनका समाधान तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों के कारण शीघ्रता से नहीं हो पाता। कवर्धा जिले के बीसाटोला गांव के गौकरण की समस्या थी कि उसने घर पर बिजली के कनेक्शन तो जोड़ लिए पर यहां तक खंभे पहुंच नहीं पाए। समाधान शिविर में अब उसके घर तक खंभा और तार खींचने का आदेश निकाल दिया गया है। यह प्रदेश सरकार की सौभाग्य योजना है, जिसमें हर मजरे-टोले सौ फीसदी घरों तक बिजली पहुंचाई जानी है। बालोद जिले में जेवरतला एक गांव है। यहां स्कूल परिसर में उच्चदाब बिजली खंभा लगा है। इससे खतरा तो बना रहता है, बच्चों के खेलकूद की जगह भी घिरी हुई है। इसे हटाने के लिए ग्रामीणों और छात्रों ने फरवरी के शिविर में आवेदन दिया था। अब इसे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
राजस्व अभिलेखों में सुधार की प्रक्रिया काफी लम्बी और जटिल होती है क्योंकि यह सीधे-सीधे चल सम्पत्ति के हस्तांतरण का अधिकारिक दस्तावेज होता है। समाधान शिविरों में ऐसे प्रकरणों को भी तेजी से निराकृत किया जा रहा है। दुर्ग जिले के ग्राम सनौत के भान सिंह का नाम ऋण पुस्तिका में त्रुटिपूर्ण था। उसे बहुत परेशानी थी। शिविर में इसका निराकरण कर दिया गया।
दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड के मुरमुंडा समाधान शिविर में तिहारू राम की एक साल पुरानी समस्या तत्काल ही हल हो गई। ढाबा गांव के तिहारू ने एक साल पहले अपने खेत पर नलकूप का खनन करा लिया था लेकिन वहां न खंभे पहुंचे न बिजली। बिजली कनेक्शन के लिए खर्च ज्यादा बताया गया, जो उसके सामर्थ्य में नही था। उसने फरवरी में  लगाए शिविर में अपना आवेदन दिया। अब तिहारू को सौर सुजला योजना का लाभ मिलेगा। सौर सुजला योजना सूरज की रौशनी से चलने वाले बिजली पम्प हैं। इसका लाभ उन्हें मिलता है, जिनके खेतों तक बिजली के कनेक्शन नहीं पहुंच पाते। जरूरतमंद किसान इसके लिए अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण से सम्पर्क कर सकते हैं।
वृद्धावस्था और निर्धनता के थपेड़े एक साथ पड़ते हो तो जीवन-यापन दुष्कर हो जाता है। महासमुंद जिले के झाल-खम्हरिया की निरासाबाई के जीवन की निराशा समाधान शिविर में दूर करने की कोशिश की गई है। उसके लिए विधवा पेंशन की स्वीकृति दे दी गई। सोरिद ग्राम में लगे इस शिविर में नंदनी केंवट को भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ देने की कार्रवाई की गई।
भगवती राठिया, सुकांति, किरण, सुलोचना रायगढ़ जिले की कुछ ऐसी युवा हैं, जिन्हें जाति, निवास और आमदनी प्रमाण पत्रों की जरूरत थी। जीवरी ग्राम के समाधान शिविर में एक ही दिन में इन्हें ये सभी दस्तावेज दे दिए गए। इन युवाओं ने कहा कि आगे की पढ़ाई और नौकरी के लिए ये दस्तावेज बहुत जरूरी थे। लोक सुराज अभियान से उनकी परेशानी हल हो गई।
कोंडागांव जिले के विकासखण्ड फरसगांव का भोंगापाल ऐतिहासिक गांव है। निःशक्त चैतूराम ने यहां के शिविर में ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया था, जो उसे समाधान शिविर में हाथों.हाथ दे दिया गया। उसका कहना है कि अब उसे अपने जीवन-यापन के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस तरह से प्रशासन लोकोन्मुखी सरकार की मंशा के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करती रहे, इस लक्ष्य को लोक सुराज अभियान के माध्यम से सफलता पूर्वक पूरा किया जा रहा है।

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