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Bilaspur Chhattisgarh Mungeli

बिल्हा : बाबा गुरूघासीदास के 261वीं जयंती में शामिल हुए रमन, बोले – शांति, सौहार्द, प्रेम के मार्ग पर छत्तीसगढ़

बिलासपुर : मनखे-मनखे एक समान की भावना के साथ छत्तीसगढ़ राज्य विकास, सद्भावना, शांति, सौहार्द और प्रेम के मार्ग में चल रहा है। संत बाबा गुरूघासीदास ने धर्म का रास्ता दिखाया। उस रास्ते पर चलकर मानवता के लिए कार्य करना होगा। उनका पवित्र संदेश हमारे मन, वचन और कर्म में शामिल हो। यह उद्गार मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शनिवार को बिल्हा में आयोजित संत बाबा गुरूघासीदास की 261वीं जयंती के अवसर पर समारोह में व्यक्त किया। इस दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल, खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले और सहकारिता दयालदास बघेल, सांसद लखनलाल साहू विशेष रूप से मौजूद थे।

गुरु बाबा घासीदास ने किया जनता के कष्टों का निवारण : 

बिल्हा के अग्रसेन कॉलेज मैदान में हुए उक्त समारोह में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, संत बाबा गुरूघासीदास ने अपने जन्मस्थली और कर्मस्थली में तप किया और सिद्धी प्राप्त कर समाज के उद्धार के लिए निकल पड़े। जनता के कष्टों का निवारण किया। बाबा की जन्मस्थली गिरौधपुरी में आज भी जो सच्चे मन से जाता है उनकी मन्नत अवश्य पूरी होती है।

बाबा की ओर से दिए गए 7 संदेश हमें मानवता से जोड़ते हैं। आज देश-विदेश में बड़े-बड़े सेमीनार होते हैं, जहां स्त्री-पुरूष के अधिकारों की बातें की जाती है, लेकिन सैकड़ों वर्ष पहले बाबा ने कह दिया था कि, मनखे-मनखे एक समान है। स्त्री और पुरूष की समानता की बाते उन्होंने कही थी और बेटी को भी बेटे के समान मानने का उपदेश दिया था। गिरौधपुरी के विकास पर जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, जयस्तंभ का भव्य स्वरूप, लोगों के ठहरने के लिए भवन, स्थान, सड़क और क्षेत्र को हराभरा बनाने का कार्य बाबा के आर्शीवाद से किया गया है।

उन्होंने कहा कि, विकास हमारा मूलमंत्र है। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग के विकास के लिए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का निर्माण किया गया और अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल कर विकास की योजना क्रियान्वित की जा रही है। प्रदेश के 80 अनुसूचित जाति बाहुल्य पंचायतों के विकास के लिए 50-50 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रयास विद्यालय से अच्छी शिक्षा, गांव-गांव में अधोसंरचना निर्माण के लिए कार्य किए गये हैं।

उन्होंने बताया कि 8 माह के भीतर प्रदेश के 6 हजार से ज्यादा पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 30 हजार किलोमीटर केबल लाईन बिछाये जाएंगे और टावर लगाये जाएंगे और वह 50 लाख लोगों को स्मार्ट फोन दिया जाएगा। वर्ष 2018 में लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के हर गांव, टोला में कोई भी घर विद्युतविहीन न रहें।बिजली से वंचित सात लाख घरों में 8 माह के भीतर बिजली कनेक्शन दिया जाएगा।

कार्यक्रम में खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने बाबा के उपदेशों पर प्रकाश डाला। जुआ, शराब से दूर रहने, झगड़ा-झंझट न करने, उंच-नीच का भेद न करने के उनके संदेश आज मानव के लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने अपने पवित्र कर्म के प्रभाव से शेर और बकरी को एक घाट में पानी पिलाया था। उन्होंने जानकारी दी कि, बाबा के पवित्र जन्म स्थली गिरौधपुरी में 54 करोड़ का भव्य जैत स्तंभ तथा सवा दो करोड़ का सामुदायिक भवन बनाया गया है और गुरूद्वारा, गुरूगद्दी के निर्माण के लिए 1 करोड़ की राशि मुख्यमंत्री की ओर से स्वीकृत की गई है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि, सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है, यह बाबा का संदेश है। वे हमारे पथ प्रदर्शक रहे। मनुष्य ही नहीं वरन् जीव मात्र के कल्याण के लिए पूरा जीवन दिया। उनकी कर्म भूमि में छत्तीसगढ़ के अलावा देश व विदेश के लोग उनका आर्शीवाद लें, इसके लिए भव्य जैत स्तंभ का निर्माण किया गया है।

लोकार्पण और जैत स्तंभ में पूजा-अर्चना की मुख्यमंत्री ने 

इसके पूर्व डॉ. रमन सिंह ने एसडीएम कार्यालय बिल्हा के समीप 10 लाख की लागत से निर्मित सतनामी समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। इसके साथ ही जैतस्तंभ में संत बाबा गुरूघासीदास की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में शांति, सौहर्द, भाईचारे कायम रहने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान अटल व्यवसायिक परिसर निर्माण के लिए 20 लाख रुपए और जयंती कार्यक्रम समिति को स्वेच्छानुदान से 1 लाख स्वीकृत करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पाण्डेय, छग हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, राज्य सभा सांसद भूषणलाल जांगड़े, संसदीय सचिव राजू सिंह क्षत्री, तोखन साहू मौजूद थे। इसके अलावा जनप्रतिनिधि, संभागायुक्त टी.सी. महावर, कलेक्टर पी. दयानंद, पुलिस अधीक्षक मयंक श्रीवास्तव, अन्य अधिकारी-कर्मचारी और सतनामी समाज के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे।</>

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