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मुखिया के मुखारी, छत्तीसगढ़ की सुपर मेमसाहबों के चर्चे, रायपुर- 14 अगस्त 2017

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति                    

देश के कई शहरों की रातें शनिवार को गुलजार रहीं। मेरी रात…मेरी सड़क अभियान के तहत सड़कों पर मौजमस्ती करती महिलाओं और युवतियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि रात में घूमना-फिरना केवल पुरुषों की बपौती नहीं है। परंतु अगर इसे छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो यहां की महिलाएं बेहद ताकतवर हैं खासकर वे महिलाएं जिनके पति राज्य सरकार के ओहदेदार हैं।

सोशल मीडिया में इन दिनों छत्तीसगढ़ की सुपर मेमसाहबों के खूब चर्चे हो रहे हैं। इसमें यह लिखा जा रहा है कि राज्य सरकार के रसूखदार पदों पर बैठे कई अफसरों की पत्नियां संविदा अधिकारी के रूप में अनेक विभागों के मलाईदार पदों पर बैठी हुई हैं। हालात यह हैं कि ओहदेदार अफसरों की पत्नी होने की योग्यता के आधार पर ये सुपर मेमसाहबों को राज्य सरकार हर महीने अन्य सुविधाओं के अतिरिक्त लाखों रुपए का वेतन या मानदेय दे रही है। सोशल मीडिया में सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि पीएचई या संस्कृति जैसे विभागों में बड़ा पद पाने वाली इन सुपर मेमसाहबों की नियुक्ति कब और क्यों की गई और क्या इसके लिए किसी तरह का विज्ञापन जारी किया गया था। इन मेमसाहबों में ऐसे कौन से सुरखाब के पर लगे हुए हैं, जिनकी बदौलत उन्हें राज्य सरकार पाल रही है।

वैसे तो तकरीबन हर बड़े अफसर की पत्नी छत्तीसगढ़ में व्यस्त है। कोई एनजीओ संचालिका है तो कोई स्कूल चला रही है। पर सर्वाधिक चर्चा दो अफसरों की पत्नियों को लेकर होती रहती है। खुद को क्लासिकल कलाकार कहने वाली इन दोनों महिलाओं का रुतबा देखकर अच्छे-अच्छे अफसरों को दस्त लग जाते हैं क्योंकि दोनों के पतियों के इर्द-गिर्द सत्ता घूमती है। इनमें एक अफसर की पत्नी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग में संविदा पर बड़ी अफसर है और दूसरा प्रतिनियुक्ति पर संस्कृति विभाग पहुंचकर बड़ी अधिकारी बन गई है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग में अफसरी करने वाली अफसर पत्नी की नियुक्ति कब, क्यों और किसने की, इसकी जानकारी देने से हर छोटा-बड़ा अफसर घबराता है। सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए अनेक आवेदनों पर विभाग चुप्पी साध लेता है। ठेके पर स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग में अधिकारी बनी बैठी यह महिला कब कार्यालय जाती है और वहां क्या काम करती है, किसी को इसकी जानकारी नहीं रहती है लेकिन रुतबा ऐसा कि मुख्य सचिव को भी शर्म आ जाए। उसके पास भरा-पूरा स्टॉफ है, जो अक्सर उसके निजी कामों पर लगा रहता है। वेतन या मानदेय में मिलने वाली राशि को कहां से मैनेज किया जा रहा है, यह तो  लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग के अफसर ही जानते होंगे। यह महिला अफसर केवल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग में ही नौकरी नहीं करती, तथाकथित क्लासिकल डांस की बदौलत छद्म नाम से संस्कृति विभाग से हर साल लाखों रुपए का भुगतान भी ले रही है। उसका लक्ष्य एशिया की एकमात्र इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति बनने के साथ पद्मश्री या पद्म विभूषण जैसी उपाधि हासिल करना है।

एक दूसरे अफसर की पत्नी स्कूल से नौकरी शुरू करके आज संस्कृति विभाग में बड़ी अफसर बन चुकी है। इतना ही नहीं पहले उसके कला व संस्कृति के क्षेत्र में पहले अपने गुरु और फिर बेटी को स्थापित करने के बाद अपना एक स्थायी इंतजाम कर लिया। राज्भर के स्कूलों में ओडिसी नृत्य की शिक्षा को अनिवार्य कराकर उसने अपने पति के रसूख का परिचय दे दिया। अब ओडिसी नृत्य के लिए सामग्री तैयार करने का जिम्मा इस अफसर के पास आ गया है। बताने की जरूरत नहीं है कि इसमें किस तरह का खेल खेला जाएगा। नौकरशाहों से डरी राज्य की भाजपा सरकार यह सबकुछ आंख बंद करके देख रही है। उसके सामने छत्तीसगढ़ को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है परंतु सरकार में इतना साहस नहीं है कि वह इन सब गैर कानूनी कामों को रोक सके।

चूंकि अफसरों की पत्नियां संविदा पर हैं, इसलिए वे राज्य सरकार के प्रति सीधे जिम्मेदार नहीं हैं। शायद यही वजह है कि वे मनमानी पर उतारू हो चुकी हैं। उनके अधीनस्थ रोज भगवान से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में नौकरशाह और उनकी पत्नियों से अंधेरगर्दी मचा रखी है। अगले सोलह महीने प्रदेशवासियों को यह त्रासदी झेलनी पड़ेगी। शायद उसके बाद नई सुबह आए और छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ आबादी को इस सरकार और उसके अधिकतर लुटेरे नौकरशाहों से मुक्ति मिल पाए। इसके लिए प्रदेश के मतदाताओं को जागना होगा और उन्हें ऐसी सरकार चुननी होगी जो कम से कम छत्तीसगढ़ व यहां के निवासियों की पीड़ा को समझ सके।
                                                चोखेलाल
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