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मुंबई : MNS कार्यकर्ताओं और फेरीवालों के बीच संघर्ष, कार्यकर्ता जख्मी

मुंबई: मुंबई में मालाड पश्चिम में स्टेशन के पास शनिवार दोपहर एमएनएस कार्यकर्ता और फेरीवाले आपस में भिड़ गये. जिसमे एमएनएस के स्थानीय विभाग प्रमुख सुशांत मालवदे को सिर में गंभीर चोट आयी है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मामले में एमएनएस के कुल 4 कार्यकर्ता जख्मी हुए हैं और मालाड पुलिस ने 5 फेरीवालों को हिरासत में लिया है. इस वारदात के बाद से मालाड पश्चिम में रेलवे स्टेशन के आसपास तनाव बना हुआ है. झगड़े की आशंका को देखते हुए पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया है. एमएनएस कार्यकर्ता पर हमले की खबर मिलने के बाद पार्टी नेता नितिन सरदेसाई, शालिनी ठाकरे, संदीप देशपांडे सहित बड़ी संख्या में एमएनएस कार्यकर्ता मालाड पहुंचे. एमएनएस नेताओं का आरोप है कि फेरीवालों ने संजय निरूपम के उकसावे पर हमला किया इसलिए निरुपम के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए.

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने एमएनएस की फेरीवाला हटाओ मुहि‍म का विरोध किया है. उन्‍होंने जगह-जगह सभाएं कर ईंट का जवाब पत्थर से देने का आह्वान किया था. खबर है कि मालाड में भी उन्होंने फेरीवालों की सभा ली थी. जिसके जवाब में दोपहर को एमएनएस कार्यकर्ता फेरीवालों को हटाने पहुंचे थे. वो भद्दी गालियों के साथ समान पलटने लगे, उनको भगाने लगे तभी पीछे से उनपर हमला हो गया.

गौरतलब है कि एलिफिंस्टन भगदड़ हादसे के बाद से फेरीवाले एमएनएस के निशाने पर हैं. एमएनएस का आरोप है कि स्टेशन के फुटओवर ब्रिज और बाहर निकलने के रास्तों पर फेरीवालों की वजह से लोगों को परेशानी होती है और हादसे की आशंका बनी रहती है. एमएनएस नेता राज ठाकरे ने सभा लेकर रेल प्रशासन को चेतावनी दी थी कि 15 दिन के अंदर अगर प्रशासन ने सभी फेरीवालों को हटाया नहीं तो एमएनएस कार्यकर्ता खुद अपने स्टाइल में हटाएंगे. 15 दिन पूरे होने के बाद से मुंबई के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर एमएनएस कार्यकर्ताओं ने फेरीवालों की पिटाई की है उनके सामानों का नुकसान किया है.

एमएनएस की इस मुहिम का बड़े पैमाने पर स्वागत भी हो रहा है क्योंकि अवैध फेरीवालों की वजह से स्टेशनों के आसपास चलना मुश्किल हो गया था. शिकायत के बाद भी पुलिस, रेलवे और बीएमसी उन्हें हटाने की बजाय हफ्ता लेकर शह देते रहे हैं. लेकिन फेरीवालों की रोजी रोटी से जुड़ा मुद्दा भी है इसलिए कुछ लोग एमएनएस के खिलाफ भी हैं, खासकर उनकी मारपीट और गुंडागर्दी से.

मुद्दा अवैध फेरीवाले बनाम एमएनएस है लेकिन ये परप्रांतीय विरुद्ध एमएनएस बनता जा रहा है जो आगे चलकर दो समुदायों के बीच संघर्ष का रूप ले सकता है. राजनीतिक पार्टियां इस पर अपनी रोटी सेंकने में जुट भी गई हैं. लेकिन इस पूरे मामले में राज्य सरकार की मूकदर्शक भूमिका भी सवालों में है.

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