Chhattisgarh

दन्तेवाड़ा: सरपंचो ने कमीशन खोरी को लेकर डिप्टी कलेक्टर के ख़िलाफ़ की शिकायत

दन्तेवाड़ा: जिले में प्रशासन ने कई पदों पर प्रयोगिक तोर पर राजस्व के अधिकारियों को विकास खण्ड स्तर के अधिकारी नगर पंचायतों के अधिकारी के बतौर प्रभार सोपा ताकि कार्यो में कसावट दिखाई दे। वही आम जनता को बेवजह परेशानी न हो जिले के अन्य विभागों के अधिकारियों के अप्रेक्षा राजस्व अधिकारियों पर ज्यादा विश्वास करने के पीछे मनसा यह थी की इनके प्रभार वाली संस्था मे जहा ईमानदारी से कार्य होगे.
वही कार्यो में गुणवत्ता अच्छी होगी तथा भृष्ठाचार कमीशन खोरी पर विराम लगेगा.. जनता की समस्या का निराकरण त्वरित ईमानदारी के साथ होगा।मगर जिस प्रकार की कार्य शैली पर ये अधिकारी कार्य को अंजाम दे रहे है उससे निराशा ही दिखाई दे रही है।एक बात तो यह है की जिस उद्देश्य को लेकर इन्हें दायित्व दिया गया उस पर ये अब तक अनफिट रहे चाहे कुआकोंडा हो गीदम हो कटेकल्याण ही क्यो न हो । असल में अधिकारी अफसरशाही की मानसिकता से बाहर नही निकल पाये ओर न जनप्रतिनिधि व जनता के बीच मधुर संबंध स्थापित करने में सफल रहे ..बल्कि प्रशासन के लिए सर दर्द ही सबित हुवे। जब तक जनता के बीच जनता के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की मानसिकता नही बना सके तो ये सफल अधिकारी कभी साबित नही हो सकते..? दर असल यहाँ का मूल निवासी आदिवासी सरल निष्कपट व ईमानदार भोले भाले प्रवर्ति का बिना किसी लाग लपेट के सादगी से जीवन जीने वाला होता है..ऐसे वन पुत्रो का अगर दिल जीत न सके.. डिप्टी कलेक्टर के द्वारा 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की जाना सारे उम्मीदों पर पानी फेरता हुवा दिखाई देता है। वैसे भी राजस्व विभाग सदियों से बदनाम है।जहाँ पटवारी भी बिना पैसा के नक्शा खसरा व जाति प्रमाण नही बनाता था।ऐसे में राजस्व विभाग के अधिकारियों पर अगर अंगुली उठे तो ये काफी गम्भीर विषय है।निर्वाचित जनप्रतिनिधियो के खेमे से अगर कमीशन खोरी की आवाज उठे चुनावी वर्ष के अंतिम पड़ाव में तो निश्चित चिंता का विषय है। जिस पर जिला प्रशासन को त्वरित कार्यवाही करनी होगी..

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