Chhattisgarh Durg-Bhilai

डॉक्टरों ने दिया कम वजन वाले नवजात शिशुओं को नया जीवन

भिलाईनगर। इस्पात संयंत्र की चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाएं विभाग अपनी उत्कृष्टता व श्रेष्ठता के चलते पूरे प्रदेश में एक अलग पहचान बना चुकी है। बीएसपी का मुख्य चिकित्सालय, जवाहरलाल नेहरु चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र जहाँ संयंत्र कर्मियों के लिए जीवनदायिनी है वहीं प्रदेश के मरीज़ों के लिए भी वरदान साबित हुई है। विभिन्न सुविधाओं से सुसज्जित बीएसपी का यह अस्पताल अपनी सेवाओं के चलते ही एक मिसाल बन चुका है।

वर्तमान में बीएसपी के सेक्टर-9 अस्पताल का नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई अपने उत्कृष्टता एवं अपने क्वालिटी ट्रीटमेंट के लिए विख्यात है। नवजात शिशुओं के जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बीएसपी अस्पताल में नवजात शिशुओं के मृत्युदर वर्ष 2017-18 में लगभग 10.7 प्रति हजार लाइव बर्थ थी। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह मृत्युदर लगभग 26 प्रति हजार लाइव बर्थ है। इसी प्रकार बीएसपी के सेक्टर-9 अस्पताल के नियोनेटल यूनिट के प्रयासों से अत्यधिक कम वजन वाले बच्चों का सर्वाइवल रेट 92 प्रतिशत से अधिक है। ये आँकड़े अपने आप में नियोनेटल यूनिट के चिकित्सकों व स्टॉफ के क्वालिटी ट्रीटमेंट को इंगित करते हैं।
हमने हाल ही में अत्यधिक कम वजन वाले जुड़वा बच्चों के जीवन बचाने के एक ऐसे ही प्रयास को सफ लतापूर्वक अंजाम देने वाले डॉ.जी.मालिनी एवं डॉ.सुबोध साहा से इस संबंध में विस्तृत चर्चा की। साथ ही इन नवजात शिशुओं के माता-पिता से भी बातचीत की।

बीएसपी के प्रतिष्ठित नियोनेटल यूनिट के कुषल डॉ.जी.मालिनी एवं डॉ.सुबोध साहा की टीम द्वारा यादव परिवार के नवजात शिशुओं की जिन्दगी बचाने हेतु किये गये सफ ल प्रयासों ने जहाँ इन नवजात शिशुओं को नया जीवन देने में सफल हुए वहीं बच्चे के माता-पिता श्रीमती भारती यादव एवं जवाहरलाल यादव के चेहरे खिल उठे।
नवजात शिशुओं के पिता भिलाई-3 निवासी के निवासी ट्रांसपोर्टर जवाहरलाल यादव इलाज के संबंध में बताते हुए कहते हैं कि, हमारे जुड़वा बच्चों की यह 8 माह की प्री मेच्योर्ड डिलेवरी थी। बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने के साथ ही इनका वजन क्रमश: 1400 ग्राम व 1300 ग्राम थी। यह सामान्य नवजात शिशुुओं के वजन के मुकाबले अत्यंत ही कम था तथा दोनों बच्चों की स्थिति बड़ी नाजुक बनी हुई थी। हम लोग बच्चों के जीवन को लेकर बेहद चिंतित थे और बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे। परंतु डॉ.जी.मालिनी एवं डॉ.सुबोध साहा की टीम ने मेरे बच्चों को नया जीवन दिया है। मेरे प्रथम पुत्र को 17 दिन तथा दूसरे पुत्र को 21 दिन नियोनेटल आईसीयू में रखकर बेहतर इलाज किया गया। जिसके फलस्वरूप आज हम अपने बच्चों की किलकारियाँ सुन पा रहे हैं।

मुझे शुरू से ही सेक्टर-9 अस्पताल के चिकित्सकों पर पूरा भरोसा था। क्योंकि किसी भी प्रकार की क्रिटिकल स्थिति में सेक्टर-9 में बेहतर इलाज हो सकता है। मेरे इस विश्वास को सेक्टर-9 अस्पताल के चिकित्सकों ने सही सिद्ध किया। मैं अपने अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूँ कि, बीएसपी का नियोनेटल आईसीयू प्रदेश के बेस्ट आईसीयू में से एक है। बीएसपी अस्पताल के संयुक्त निदेशक डॉ.जी.मालिनी ने बताया कि, जन्म से ही बच्चों का वजन काफ ी कम था। साथ ही उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। अत: अत्यधिक लो बर्थ वेट के चलते यह इलाज अत्यंत क्रिटिकल था। अंतत: हमारे डॉक्टरों एवं स्टॉफ की समर्पित टीम ने बड़ी कुशलता व निपुणता दिखाते हुए इन नवजात शिशुओं के जीवन बचाने में सफलता पाई। सीनियर उप निदेशक डॉ.सुबोध साहा का मानना है कि, नवजात शिशुुओं का जीवन बचाकर जहाँ हमें खुशी मिलती है वहीं बीएसपी अस्पताल की प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है।  इस क्रिटिकल केस को सफ लतापूर्वक पूर्ण करने वाले डॉक्टरों की टीम में बीएसपी के संयुक्त निदेशक डॉ.जी.मालिनी व सीनियर उप निदेशक डॉ.सुबोध साहा के साथ-साथ नियोनेटल यूनिट के अन्य डॉक्टरों व स्टॉफ ने विशेष भूमिका निभाई।

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