Chhattisgarh

भयंकर सूखे की चपेट में छत्तीसगढ़ : केन्द्रीय टीम

रायपुर: गुरूवार को मंत्रालय में केन्द्रीय सूखा अध्ययन दल के साथ मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। भारत सरकार के संयुक्त सचिव के.एस.श्रीनिवासन के नेतृत्व में आए केन्द्रीय अध्ययन दल की तीन टीमों ने 21 से 23 नवम्बर तक प्रदेश के सूखा प्रभावित जिलों बेमेतरा, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद और दुर्ग, राजनांदगांव और रायपुर जिले का भ्रमण कर सूखा प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन किया था। दल के सदस्यों ने गुरूवार को मुख्य सचिव विवेक ढांड के साथ बैठक में उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया।
संयुक्त सचिव के.एस.श्रीनिवासन ने कहा कि, टीम के सदस्यों ने जिलों के भ्रमण के दौरान किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर सूखे की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि, अध्ययन दल के सदस्यों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मनरेगा, निस्तार और पेयजल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन बांटने और धान खरीदी की भी जानकारी ली है। मुख्य सचिव ढांड ने केन्द्रीय अध्ययन दल को प्रदेश में सूखे की स्थिति की जानकारी दी।

21 जिलों की 96 तहसीलें सूखा प्रभावित :

उन्होंने इस बात को भी केन्द्रीय अध्ययन दल के सामने रखा कि, छत्तीसगढ़ में 27 जिले और 150 तहसील हैं, जिनमें से 21 जिलों की 96 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि, अल्प वर्षा, खण्ड वर्षा और समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण धान की बियासी और निंदाई का कार्य समय पर नहीं हो पाया, जिसके कारण खरपतवार बढ़ गए, जिससे धान की फसल का ग्रोथ और उत्पादकता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। केन्द्रीय अध्ययन दल के ध्यान में यह भी लाया गया कि, सूखा प्रभावित जिन जिलों और तहसीलों का भ्रमण किया गया, वहां भी धान की फसल गंभीर रूप से प्रभावित हुई। ऐसी स्थिति अन्य सूखा प्रभावित जिलों की भी है, जिस पर केन्द्रीय अध्ययन दल ने अपनी सहमति व्यक्त की।
बैठक में अपर मुख्य सचिव कृषि अजय सिंह, अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास एम.के. राउत, प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति ऋचा शर्मा मौजूद थे। इसके अलावा सचिव राजस्व और आपदा प्रबंधन एन.के. खाखा, सचिव जल संसाधन सोनमणि बोरा, सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी शहला निगार, विशेष सचिव ऊर्जा सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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