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Bilaspur Chhattisgarh

इस योजना के बंद होने से गरीबों के सामने गहराया संकट

बिलासपुर: जिला व जनपद पंचायत के अफसरों की लापरवाही के चलते जिले के दो हजार आवासहीन गरीब हितग्राहियों के सामने आवास का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल इंदिरा आवास योजना के तहत इनको खुद का आशियाना उपलब्ध कराना था। फाइल आगे बढ़ती इसके पहले ही केंद्र सरकार ने योजना को बंद कर दिया ।

वर्ष 2014-15 में जिले के दो हजार बीपीएल हितग्राहियों को मकान उपलब्ध कराने जिला पंचायत ने लक्ष्य रखा था। इंदिरा आवास योजना के तहत इनको आवास की सुविधा मुहैया कराई जानी थी । वर्ष 2011 की सर्वे सूची में इन सभी हितग्राहियों का नाम शामिल है। ग्राम पंचायतों से इनके नाम का प्रस्ताव भी पारित करा लिया गया था।

ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव जनपद पंचायत और वहां से जिला पंचायत के हवाले कर दिया गया था। इनके नाम से आवास स्वीकृत होता इसके पहले ही केंद्र सरकार ने एक निर्देश जारी कर इंदिरा आवास योजना को ही बंद कर दिया। कांग्रेस शासनकाल की इस महत्वाकांक्षी योजना को बंद करने के साथ ही आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने केंद्र ने नई योजना लांच कर दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बीपीएल हितग्राहियों को आवास दिया जा रहा है। इसके लिए कठिन शर्त भी रखी गई है। पुरानी योजना बंद होने और नई योजना के लागू होने के बीच जिले के दो हजार गरीब हितग्राहियों की फाइल भी कहीं खो गई है।

प्रधानमंत्री आवास में शामिल नहीं हो रहा नाम

इंदिरा आवास योजना में नाम शामिल किए जाने के बाद अब इनको पीएम आवास योजना में शामिल नहीं किया जा रहा है। अफसरों को यह लगने लगा है कि इन्हें पुरानी योजना के तहत आशियाना मिल गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से 40 हजार हितग्राही बाहर

वर्ष 2011 की सर्वे सूची के आधार पर जिले में एक लाख 40 हजार हितग्राही है। सर्वे के दौरान 40 हजार ऐसे हितग्राहियों का नाम सामने आया है जिनके पास दो कमरों का मकान है। लिहाजा इन हितग्राहियों को योजना से बाहर कर दिया गया है।

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