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चार साल अहंकार: पांचवे साल पहुंचे जनता के दरबार

रायपुर: भाजपा की जनसंपर्क यात्राओं को चार साल अहंकार: पांचवे साल पहुंचे जनता के दरबार की संज्ञा देते हुये प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद और विधायक 4 साल से जनता के बीच नहीं गये है। अब चुनाव सामने देख कर इनको जनता की याद आ रही है, जनसंपर्क की याद आ रही है, जनता की आर्शिवाद लेने की याद आ रही है। कहां थी ये सोच जब नसबंदी कांड हुआ था, कहां थी ये सोच जब छत्तीसगढ़ में आकाल पड़ा था और किसानो को बांधो से पानी नहीं दिया जा रहा था, ये सोच उस समय कहां थी। जब वन अधिकार पट्टो के लिये कांग्रेस लगातार लड़ रही थी, पदयात्रा निकाल रही थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधी एसी गाड़ियों में सफर कर सरकारी वैभव का सुख भोग रहें थे और आज चुनाव देख कर एसी गाड़ीयों को छोड़ झटक कर जनता की बीच जनसंपर्क करने के लिये निकले है।

भाजपा की जनसंपर्क यात्रा जहां-जहां जा रही है गांव के संरपचो को खाने एवं तमाम तरह की दीगर व्यवस्थायें करने के लिये भाजपा दबाव डाल रहे हैं और खाने पीने की और दीगर व्यवस्थायें नहीं करने पर धारा 40 लगाने की धमकी दी जा रही है। साथ ही लोगो को जबरिया भाजपा का दुरंगा दुपट्टा ओढ़ने पर मजबूर किया जा रहा है। सीधे-सीधे गांव वाले के गले में फांसी के फंदे की तरह दुरंगा दुपट्टा कसा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भाजपा के प्रति जनसंपर्क यात्रा से गहरी नाराजगी है। जहां-जहां से भाजपा की जनसंपर्क यात्रा निकल रही वहां-वहां दहशत का माहौल है। गांव में भाजपा की जनसंपर्क यात्रा आने के पहले सरपंच या तो रिश्तेदारो के घर दूसरे गांव चले जाते है या कहीं जाकर छिप जा रहे है या अस्पताल में भर्ती हो जाते है। भाजपा के इस राजनैतिक कार्यक्रम को चलाने में और धमकी देने में सरकारी अमले का जमकर दुरूपयोग किया जा रही है। दरअसल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की पदयात्राओं और कांग्रेस विधायक दल के  नेता टी.एस. सिंहदेव के जनघोषणा पत्र को मिले जनसमर्थन से बीजेपी में हार का भय व्याप्त है। तीन बार छत्तीसगढ़ की जनता को छला गया है। इस बार समाज के सभी वर्ग रमन सरकार के कुशासन का अंत करने के लिये संकल्पित है। जनता बीजेपी के चार साल अहंकार, 5वें साल जनता क द्वार के भाजपाई फार्मूले को बखूबी समझ चुकी है। भाजपा की जनसंपर्क यात्रा केवल और केवल एक ढोंग है, दिखावा है। जनसंपर्क से और जनता से भाजपा का और भाजपा के जनप्रतिनिधियों का कोई लेना देना नहीं है। चुनाव में कुछ महीनें बचे देखकर हार के भय से यह भाजपा की दिखावटी कसरत है।

कांग्रेस की पदयात्राओं पर भाजपा ने व्यंग कसा था। इन्हें व्यर्थ की एक्साईज कहा। तबीयत खराब होने पर तबीयत ठीक करने के लिये कांग्रेसी पदयात्रा कर रहें है ऐसी बाते कहीं। क्या आज यही बात भारतीय जनता पार्टी पर लागू नहीं होती है। भाजपा बताये कि क्या चुनाव देख कर उनकी तबीयत खराब हो गयी? दरअसल चुनाव सामने देखकर और जनता की भाजपा के प्रति नराजगी देखकर भाजपा को नानी याद आ गयी।

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