Chhattisgarh Koriya

भूतों के डर से ग्रामीण कर रहे हैं पलायन

कोरिया: जिले के चिरमिरी निगम क्षेत्र के ग्राम साजापहाड़ की कोल माइंस भूतों के बसेरे के नाम से पहचाना जाता है. अक्सर यहां के मांइस को लेकर कई किस्से चर्चा में रहे हैं. आज भी लोग इस माइंस के सामने से गुजरते वक्त सहम जाते हैं. ये मांइस अक्सर विवाद और लोगों के डर का कारण बनी रही है. लोगों का मानना है कि दशकों पहले यहां के खान में दुर्घटना हुई थी.

इस माइंस में एक पाली (शिफ्ट) के सारे मजदूर यहां दब गए थे, जिन्हें बाहर नहीं निकाला गया. जिनकी चिखें और काम करने की आवाजें आज भी यहां आती है. देर रात माइंस के करीब से अजीब आवाजें आती है, जो लोगों के डर का कारण है. लोगों का मानना है कि माइंस के अंदर से भयानक अवाजें आती हैं. इसके चलते ही ग्रामीण गांव छोड़कर जाने लगे हैं.​

ऐसी ही एक कहानी चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गांव साजापहाड़ की है. रोजगार की कमी और जंगली जानवरों के साथ भूतों के खौफ से धीरे-धीरे पूरा गांव खाली हो चला है.

हालांकि मांइस में अब पानी भर चुका है, इसके मुहाने को भी दिवार से बंद कर दिया गया है. गांव वालों के मुताबिक, यहां काम करने वाले मजदूर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, मऊ गोरखपुर जिले तरफ के थे. ठेकेदार और मैनेजर के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसका खामियाजा यहां काम करने वालें मजदूरों को भुगतना पड़ा. ऐसा आरोप है कि मैनेजर और ठेकेदार की अनबन के कारण ब्लास्ट कर मजदूरों को दबा कर मार डाला गया.

मांइस की छत बैठने के बाद ठेकेदार द्वारा मांइस का दरवाजा भी बंद कर दिया गया. अब ग्रामिणों का कहना है कि उन्हें वहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि आज भी खदानों में काम कर रहें है, लेकिन वह किसी को यह बात बताने में डरते हैं.

मिर्जापूर के रहने वाले है बुजूर्ग ग्रामिण नन्कूराम ने बताया कि वह सन् 1968 में यहां मालकट्टा का काम करते थे, एक गाड़ी भरने पर 9 रुपए मिलता था. मैनेजर सैगल साहेब और शहडोल के धोड़ी ठेकेदार कोयला निकलवाने का काम करते थे. ग्रामिण मनोज यादव ने बताया कि आज भी डर लगता है, ऐसा लगता है मजदूर काम करें हो, रात में उनके काम करने की आवाजें सुनाई देती है, शाम ढलते ही गाय भैंसो का सहारा लेकर आ जाते हैं, उसके बाद कोई भी उस ओर नहीं जाता.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *