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घोटुल की परंपरा का खत्म होना युवाओं के लिए नुकसानदेह

जगदलपुर : भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के उपक्षेत्रीय केंद्र धरमपुरा में दो दिवसीय वेरियर एल्विन की जनजातीय दुनिया पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ता अमिताभ सरकार ने कहा कि घोटुल की परंपरा का खत्म होना युवाओं के लिए नुकसानदेह है।

बस्तर में घोटुल की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके जरिए ग्रामीणों को उनके रिवाज और परंपराओं का ज्ञान और जानकारी मिलती थी, लेकिन समय के साथ ही यह परंपरा अब खत्म हो रही है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण युवाओं को होगा।

उन्हेंतो उनकी संस्कृति का पता चलेगा ही और ही सदियों से चली रही परंपराओं और रीति रिवाजों की जानकारी ही मिलेगी। उन्होंने कहा कि वेरियर एल्विन ने जिस घोटुल की जानकारी पूरे विश्व के लोगों को दी, उसके संरक्षण का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि घोटुल को लेकर आदिवासियों में काफी आस्था थी। बीयू के कुलपति शैलेंद्र कुमार ने कहा कि घोटुल की गतिविधियों को लेकर आने वाले दिनों में रिसर्च किया जाएगा। वक्ता विनय कुमार ने कहा कि घोटुल की परंपरा जीवित रहे इसके लिए सभी को कोशिश करनी होगी।

इस मौके पर डायरेक्टर विनय कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर मिताश्री मित्रा, उमेश कुमार, डॉ गौतम, डॉ आनंद मूर्ति, संग्रहालय अध्यक्ष के एम सिन्हा राय, अनुसंधान सहायक, विजय कुमार, डॉ जयंत सरकार, डॉ समीरा दासगुप्ता, डॉ बीएल झा, राजेश रोशन, शांति सलाम अन्य लोग मौजूद थे।

दो दिवसीय इस सेमिनार में वेरियर एल्विन के पुत्र अशोक एल्विन भी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने जिस काम को शुरू किया है वे उसे आगे बढ़ाएंगे। सबसे पहले उनके पिता की ओर से लिखी गई किताबों का प्रकाशन कराएंगे। 2019 में नई दिल्ली में प्रदर्शनी लगवाएंगे जिसमें उनके पिता की ओर से लिखी गई किताबों की पांडुलिपि शामिल होंगी। अशोक ने कहा कि वे पहली बार बस्तर आए हैं। इस समय वे शिलांग में रह रहे हैं।

वेरियरएल्विन की जनजातीय दुनिया कार्यक्रम में मानव विज्ञान संग्रहालय के अधिकारियों की ओर से बस्तर की जनजातीय व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनी लगाई गई थी। जिसे देखने के लिए कुलपति और कार्यक्रम में शामिल होने आए लोग पहुंचे ।

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