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प्रशासन को जगाने दिव्यांगों को करना पड़ रहा है सद् बुद्धि यज्ञ, जानिए क्या है कारण

  • नि:शक्तजन अधिकार सहयोग समिति ने सौंपा दस सूत्रीय ज्ञापन।

राजेन्द्र राठौर@जांजगीर-चांपा. जिला प्रशासन को नींद से जगाने नि:शक्तजन अधिकार सहयोग समिति छत्तीसगढ़ सद्बुद्धि यज्ञ करेगी। इससे पहले समिति के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित दस सूत्रीय ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि जिला अस्पताल के अस्थिरोग विशेषज्ञ जिले के असल दिव्यांगों के हक को मार रहे हैं। उन्होंने थोक के भाव में फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र जारी किए हैं, जिसकी शिकायत प्रशासन से कई मर्तबा की जा चुकी है। इसके बावजूद शिकायत पर कार्यवाही नहीं होने के चलते उन्हें प्रशासन को नींद से जगाने सद्बुद्धि यज्ञ करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

नि:शक्तजन अधिकार सहयोग समिति के प्रांताध्यक्ष राधाकृष्ण गोपाल द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2015 में नि:शक्त संगठन द्वारा 14 सूत्रीय मांगें रखी गई थी, जिसे लेकर संगठन द्वारा पांच अगस्त 2017 से अनिश्चितकालीन आंदोलन किए जाने की चेतावनी देने के बावजूद शासन- प्रशासन द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में समिति द्वारा आंदोलन की शुरू के तौर पर प्रथम चरण में आगामी 9 अक्टूबर को कचहरी चौक जांजगीर में जिला प्रशासन को नींद से जगाने के लिए सद्बुद्धि यज्ञ किया जाएगा।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि जिले में विवाहित और अविवाहित नि:शक्तों का राशन कार्ड नहीं बनाया जा रहा है तथा रोजगार गारंटी के तहत नि:शक्तों का जॉब कार्ड प्रत्येक ग्राम पंचायत में नहीं बनाए जा रहे हैं। इसी तरह नि:शक्तों को प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित नहीं किया जा रहा है। साथ ही 40 फीसदी से अधिक के सभी नि:शक्तों को बैटरी वाली गाड़ी प्रदान नहीं की जा रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सभी जनपदों में शिविर लगाकर नि:शक्तों का बस पास नहीं बनवाया गया है। साथ ही संगठन को कार्यालय के लिए जिला मुख्यालय में भवन उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। इसके अलावा विकलांग कोटे में फर्जी तरीके से नियुक्त कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात कही गई थ, जिस पर अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है।

जिले में पुनर्वास केन्द्र खोलने की बात कही गई थी, किन्तु अब तक केन्द्र नहीं खोला गया है। चाइस सेंटर की वेबसाइट में नि:शक्तों के लिए अपमानजनक भाषा का उपयोग किया जा रहा है, जिसे समाप्त कर तत्काल सम्मानजनक भाषा में परिवर्तन लाया जाए। साथ ही साइट संचालक पर अधिनियम के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि वर्तमान में जिला अस्पताल जांजगीर में कार्यरत अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएच चंदेल द्वारा नि:शक्तों के साथ जिस प्रकार गाली-गलौज और दुव्र्यवहार किया जा रहा है, उससे नि:शक्त क्षुब्ध हैं। डॉ. चंदेल के विरूद्ध जिला प्रशासन के समक्ष कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, इसके बावजूद उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने से डॉ. चंदेल का हौसला बुलंद है। डॉ. चंदेल पर उचित कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल मेडिकल बोर्ड से हटाया जाए तथा नि:शक्तजन अधिकार अधिनियम 2016 में नि:शक्त के अपमान की जो भी सजा उल्लेखित हो, उन्हें तत्काल दी जाए। ज्ञापन में आगे कहा गया है कि उपरोक्त सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए सभी मांगे जल्द पूरी की जाए, अन्यथा 9 अक्टूबर को नि:शक्तजन अधिकार सहयोग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा अनिश्चितकालीन आंदोलन की पहली कड़ी में जिला प्रशासन को जगाने सद्बुद्धि यज्ञ किया जाएगा।

इस दौरान कोई भी अप्रिय स्थिति निर्मित होगी, उसके लिए शासन-प्रशासन जवाबदेह होगा। नि:शक्तजन अधिकार सहयोग समिति ने ज्ञापन की प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, समाज कल्याण मंत्री रमशीला साहू, समाज कल्याण विभाग के सचिव सोनमणि बोरा, मुख्य सचिव विवेक ढांढ सहित अन्य कई उच्चाधिकारियों को प्रेषित की है।

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