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यहाँ एम्बुलेंस से नहीं कंधो पर लाया जाता है मरीज

झारखंड: लोहरदगा के पठारी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा की तरह इन दिनों भी कंधों पर चल रही है। कंधो पर मरीज को लादकर परिजनों को आज भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। यहां के लोगों के लिए यह नियति बन कर रह गई है। इस क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई वर्षो से चिकित्सक नहीं पहुंचे हैं। देख-रेख के अभाव में स्वास्थ्य केन्द्र ने दम तोड़ दिया है।

बता दें कि लोहरदगा जिला के पठारी क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बाइक एम्बुलेंस की शुरुआत सीएम रघुवर दास के हाथों की गई थी। लेकिन यह व्यवस्था शुभारंभ के साथ ही खत्म भी हो गई. ऐसे में ग्रामीण जनता अपने पुराने व्यवस्था पर लौट गई। पूरे मामले में सिविल सर्जन पैट्रिक टेटे का भी कहना है कि ऐसे इलाकों में इन्फ्रास्टकचर की कमी है। सड़कों के हालात वाहनों के अनुकूल नहीं हैं।  ऐसे में इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था कायम रख पाना एक कठिन कार्य बन गया है।

राज्य में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बहाल कराने के दावे सरकार द्वारा बार-बार किए जा रहे हैं। लेकिन गांव की पुरानी स्थिति में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है। ऐसा लगता है कि इसे देखने और सुधारने वाला कोई नहीं है। आदिमजनजाति बाहुल इलाके वाले इस पठारी क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था कई सवाल खड़ा कर रहा है। लेकिन इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था यहां आज भी राम भरोसे चल रहा है।

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