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कवर्धा : शराब की बोतलों के बीच खेलने को मजबूर नेशनल खिलाड़ी

कवर्धा :  जिस जिले के मैदान ने राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा हुए है। अब उसी जिले के खिलाडिय़ों को शराब की खाली बोतले उठा कर मैदान साफ करना उनकी नियति बन गई है । लगभग सात साल होने को हैं। कवर्धा में हॉकी बॉलबैडमिंटन कि टीम को रोजाना सुबह – शाम अभ्यास स्थानीय करपात्री मैदान में करते है। खिलाड़ी मैदान से शराबियों की ओर से फेंकी हुई बॉटल उठाते हैं ।

kawrdha playerजिले के 62 खिलाडी राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में खेल चुके :

बच्चों ने भले ही जिले का नाम रोशन किया है पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते धूल धूसरित मैदान में खेलना बच्चों की नियति बना हुआ है । धूल की वजह बच्चों को खाँसी और अलर्जी हो रही हैं।

तमाम कमियों के बावजूद हर साल बॉलबैडमिंटन मे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं जीत कर बच्चे जिले का नाम रोशन कर रहे है। गर्व का विषय है कि जिले की बालिकाएँ आज तक कोई मैच नही हारी है और लगभग15-20 बच्चे हर साल नेशनल जा रहे है। अभी तक लगभग 62 खिलाडी नेशनल मैच खेल चुके हैं ।

नेशनल खेल में कवर्धा के खिलाडियों को छत्तीसगढ टीम की कप्तानी का मौका भी मिला है । बॉलबैडमिंटन मे छतीसगढ़ टीम ने पहली बार नेशनल मे स्थान बनाया, जिसमें भी कवर्धा के 5 मे से 3 खिलाडी थे। इसमें कप्तान भी कवर्धा कि खिलाडी ही थी। नेशनल मे हर साल बेस्ट प्लेयर का आवार्ड कवर्धा के खिलाडीयों को मिलता आया है । आभावो के बावजूद आज कवर्धा मे सबसे ज़्यादा बच्चे हॉकी और बॉलबैडमिंटन मे ही है।

पर खिलाडीयों को कोई मदद नही मिल रहा है, न मैदान है न खेल समाग्री फिर भी बच्चे रोज अभ्यास कर रहे हैं । बच्चों की मार्मिक अपील का एक मैसेज, जिसमे उन्होंने मैदान और सुविधा उपलब्ध कराने के मांग की है इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो चर्चा का विषय बना हुआ है ।</>

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