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तलाक, तलाक, तलाक इश्यू : आज होगा कोर्ट का ‘सुप्रीम’ फैसला

देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चा का का बड़ा विषय रहा तीन तलाक के मसले को लेकर आज बेहद खास दिन हैं। दरअसल मामले मेें सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाने जा रहा हैं। तीन तलाक को लेकर 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में शुरु हुई सुनवाई 18 मई को खत्म हुई थी जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। आज करीब 10:30 बजे कोर्ट फैसला सुना सकता है।

मां-बेटी ने खून से चीफ जस्टिस लिखी दरख्वास्त!

देशभर में तीन तलाक का मामला गर्माया हुआ। इसी बीच मध्यप्रदेश के देवास जिले के एक मुस्लिम युवक ने तीन तलाक कहकर अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। तलाक मिलने के बाद पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टीस को अपने खून से दरख्वास्त लिखी। जिसमें कहा कि न्यायालय मुझे न्याय दें, अन्यथा मुझे इस घुट-घुट कर मरने वाली जिंदगी नहीं जिना आत्महत्या की अनुमति दे। उधर पति ने बयान जारी किया है, कि मैंने नियमों का पालन करते हुए अपनी पत्नी को तलाक दिया है।
देवास जिले के दत्तोतर गांव की शबाना बी ने कहा कि मैं नर्सिंग का कोर्स कर चुकी थी और नौकरी करना चाहती थी। लेकिन मेरा पति टीपू शाह खेत में काम करवाना चाहते थे, मना करने पर पति मारपीट करता था। मैं परिवार के साथ रहना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया। देहज के लिए भी मुझे प्रताडि़त किया फिर दूसरी शादी कर ली।
पीडित महिला ने यह लिखी दरख्वास्त
श्रीमान, मुख्य न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
विषय: तीन तलाक के संबंधी।
महोदयजी,
मैं शबाना शाह पिता जुम्मा शाह निवासी, ग्राम दत्तोतर जिला व तहसील देवास (मध्यप्रदेश) मेरा शादी मुस्लिम रिति रिवाज के अनुसार 25-5-2011 को टिपू शाह पिता मंगू शाह के बेटे से ग्राम महूखेड़ा जिला देवास तहसील हाटपिपलिया, मप्र में हुई थी। मेरी एक चार साल की लड़की भी है, जिसका नाम तेहजिब है। मेरे पति टिपू शाह ने मुझे शारीरिक, मानसीक रूप से परेशान करके और तीन बार तलाक-तलाक कहकर मुझे तलाक दे दिया गया और मुझे और मेरी बच्ची को छोड़ दिया और कहा कि तुम मुझे पसंद नहीं हो और उसके बाद मेरे पति टिपू शाह ने दिनांक 19-11-2016 को दूसरी शादी कर ली। अब मैं तीन तलाक के सख्त खिलाफ हूं। अब मुझे देश का जो कानून है, जो सब के लिए समान है, इस कानून के तहत न्याय मिले। पर्सनल लॉ को मैं नहीं मानती हूं, जिससे मेरी और मेरी बच्ची का भविष्य खराब हो गया। मुझे अपने देश के कानून पर पूरा विश्वास है, कि मुझे और मेरे जैसी ओर कई बहन-बेटियों को न्याय मिले।
क्यों कि मेरे जैसी कई बहन-बेटियों को बच्चे पैदा करने के लिए समाज में कब तक सहना पड़ेगा। यह लड़ाई मेरी और मेरी बच्ची और ऐसे कई बच्चों की है और ऐसी कई बहनों की है। जिन्हें इस तरह से छोड़ दिया जाता है। क्या इसी तरह बेटी होने की सजा जो मुझे पर्सनल लॉ ने दी है। मैं ऐसी जिंदगी से हताश हो चुकी हूं और मैं अपने मां बाप पर बोझ नहीं बनना चाहती हूं। मैं ऐसी जिंदगी नहीं जिना चाहती हूं। जहां मौत से भी बत्तर जिंदगी हो मौत तो एक बार आती है। और ऐसी मौत मैं हर रोज मरती हूं। ऐसे पर्सनल लॉ के तीन तलाक के कानून को रद्द किया जाय और मैं अपने मां-बाप पर बोझ नहीं बनना चाहती। मैं ऐसी जिंदगी नहीं जिना चाहूती हूं।मुझे न्याय दिलाया जाए, या मुझे और मेरी बच्ची को आत्महत्या करने की इजाजत दी जाए।
यह पत्र मैं अपने खुन से लिख रही हूं।

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