Chhattisgarh Mahasamund

फूलों की खेती बदल रही महासमुंद की तस्वीर

महासमुंद: महासमुंद के किसानों फल, सब्जी, मसाला और फूलों की खेती के माध्यम से न केवल आधुनिक और उन्नत खेती को अपना रहे हैं बल्कि इसे पूरी दक्षता और सफलता के साथ करते हुए अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। उद्यानिकी के इस विविध खेती ने उन्हें साल भर रोजगार देने और आमदानी बढ़ाने का श्रेष्ठ साधन दिया है।

फूलों की खेती अब महासमुंद की तस्वीर बदल रही है।
सहायक संचालक उद्यानिकी आरएस वर्मा ने कहा कि, पिछले लगभग 14 वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा और उत्पादन बेहद तेज गति से बढ़ा है। वर्ष 2003 में जहां फलों का रकबा 162 हेक्टेयर था, वह वर्ष 2017 में बढ़कर 9474 हेक्टेयर हो गया। इसी तरह सब्जी का रकबा 2774 हेक्टेयर से बढ़कर 14 हजार 623 हेक्टेयर, मसाला का रकबा 479 हेक्टेयर से बढ़कर 5009 हेक्टेयर और फूलों का रकबा लगभग शून्य हेक्टेयर से बढ़कर 1129 हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह उत्पादन की दृष्टि से वर्ष 2003 में जहां 1987 मीटरिक टन फल का उत्पादन होता था, वह 2017 में बढ़कर 1,42,629 मीटरिक टन हो गया है।

इसी तरह सब्जी का उत्पादन 45,708 मीटरिक टन से बढ़कर 242670 मीटरिक टन, मसाला का उत्पादन 276 मीटरिक टन से बढ़कर 39256 मीटरिक टन और फूलों का उत्पादन लगभग शून्य से बढ़कर 5757 मीटरिक टन हो गया है।

सहायक संचालक उद्यानिकी ने जानकारी दी कि, उद्यानिकी की खेती करने वाले किसानों को राज्य शासन ने अनेक सुविधाएं दी जाती है। किसानों को फूल पौधों के कंद और बीज नि:शुल्क दिए जाते है। इसके अलावा किसानों को फूलों की खेती का मागदर्शन भी दिया जाता है। फूलों की खेती की दृष्टि से अब महासमुंद के फूल राजधानी के साथ-साथ राज्य के विभिन्न स्थानों तथा महाराष्ट्र और ओडि़शा और अन्य राज्यों में भी भेजे जा रहे हैं। उद्यानिकी की खेती ने सामान्य और बंजर भूमि को भी फायदे की खेती का आधार बनाया है।

जिले के किसानों को अब फूलों की खेती रास आ रही है। इसने महासमुंद जिले के सैकड़ों-हजारों खेतों को फूलों की बगिया के रुप में उभारा है। फूलों की खेती से किसानों को समय-समय पर होने वाली त्यौहारों और शादियों के दौरान और भी अधिक लाभ मिलता है। यह किसानों की माली हालत को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
महासमुंद से तुमगांव के बीच गाड़ाघाट नाला के समीप तुषार चंद्राकर के खेत दूर से ही सोने सी चमक लिए हुए पीले रंगों के गेंदों से लदे कतारबद्ध पौधों से लहलहाते नजर आते हैं। तुषार ने अपने खेतों को केवल गेंदें की फसल तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ये खेत ग्लेडोलाईडर के विविध रंगों और रजनीगंधा के मनमोहक खुशबू से भी महकते नजर आते हैं। उन्होंने यहां पर पांच एकड़ की खेत में सिंचाई के लिए ड्रिप एरिकेशन का सहारा लिया है। उनके फूलों को हाथों-हाथ लिया जाता है।
फूल को राजधानी रायपुर के अलावा दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर भी जाते है। महासमुंद विकासखंड के ग्राम मोहंदी के रहने वाले तुषार चंद्राकर ने अपने गांव के साथ-साथ झालखम्हरिया और मोहंदी में भी फूलों की खेती कर रहे है। उन्होंने झालखम्हरिया में पॉली हाऊस के माध्यम से गुलाब की खेती भी कर रहे हैं।

यहांनियंत्रित वातावरण और ड्रिप एरिकेशन के माध्यम सेे लाल और सफेद रंग के गुलाब के बेहद सुंदर फूल और कलियां अपने स्वस्थ और बड़े आकार के कारण एकाएक आकर्षित कर लेती है।

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