Chhattisgarh jashpur

पत्थलगांव में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने इस पहल से लौटेगी मासूमों की मुस्कान

पत्थलगांव :  कुपोषण के शिकार बच्चों की मदद के लिए समाजसेवियों, शासकीय अधिकारी व कर्मचारी संघ ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। गांवों में कुपोषित बच्चों के पालकों को जागरूक करने के लिए रविवार को किलकिला में शिविर लगाया गया। इसमें 4 गांव के 60 बच्चों और उनके परिजनों को विटामिनयुक्त आहार उपलब्ध कराया गया। कुपोषण के शिकार बच्चों को गरम कपड़े भी उपलब्ध कराए गए।\

एसडीएम प्रताप विजय खेस्स ने शासकीय कर्मचारियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस सार्थक पहल से गरीब तबके के कुपोषित बच्चों के चेहरों पर जल्द ही खुशियां लौट सकेगी। उन्होंने कहा कि महिला और बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को भी घर घर पहुंच कर कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों के परिजनों को आस पास उपलब्ध विटामिन से भरपूर हरी साग सब्जी तथा अन्य सुपोषित भोज्य पदार्थ का उपयोग करने की सलाह देें । श्री खेस्स ने कहा कि विभागीय अमला का अपनी जिम्मेदारी पर खरा उतरने से कुपोषण की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

 गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 132 :

विभिन्न गांवों में गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 132 हो गई है। महिला और बाल विकास विभाग ने सबसे अधिक डुड़ूंगजोर क्षेत्र के गांवों में इस समस्या से पीडि़त बच्चों की पहचान की है। ऐसे बच्चों का उपचार किलकिला, तमता और पत्थलगांव में किया जा रहा है। नि:शुल्क दवा वितरण की भी व्यवस्था है।

इस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस काम में भी केवल औपचारिकता बरती जा रही है। यहां पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराने के बाद एक पखवाड़ा तक बच्चे की माता को विटमिनयुक्त आहार के संबंध में समुचित जानकारी दी जाती है। कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक होने के बाद भी कई बार पोषण पुनर्वास केन्द्र के बेड खाली रहते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार की इस सुविधा के बाद भी जरूरतमंद मरीजों को लाभ नहीं मिल पाना दुर्भाग्य की ही बात है।

कुपोषित बच्चों की मदद के लिए विटामिनयुक्त आहार मुहैया कराने वाले श्रवण अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के कुपोषित होने का कारण पालकों की अशिक्षा और जागरूकता की कमी है। इसके लिए हर स्तर पर ईमानदारी के साथ प्रयास जरूरी है। गांवों में पालकों के बीच पहुंच कर उन्हें घर में ही सहज ढंग से उपलब्ध होने वाली हरी सब्जी तथा अन्य पौष्टिक आहार की विस्तृत जानकारी देने की जरूरत है। ऐसा करने से गरीब तबके के लोग भी अपने बच्चों को कुपोषण की गंभीर समस्या से बचा सकते हैं।

जरूरतमंद बच्चों को दिलाएं लाभ: सिविल अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र में 10 गंभीर बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार करने की सुविधा है। पोषण पुनर्वास केन्द्र के प्रभारी डा.बसंत गुप्ता ने रविवार को कहा कि महिला और बाल विकास विभाग आस पास के गांवों में कुपोषण के शिकार बच्चों को इस केन्द्र में भर्ती कराने के बाद उसके परिजनों को भी विटमिनयुक्त डाइट उपलब्ध कराती है। डा.सिंह ने कहा कि ग्रामीण अंचल में कुपोषित बच्चों को लाभ दिलाने के लिए तत्पर रहने की जरूरत है।

7 माह के बाद ऊपरी आहार जरूरी :

महिला और बाल विकास परियोजना अधिकारी लुसिया साहू ने कहा कि अज्ञानता की वजह से 7 माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देने में ध्यान नहीं दिया जाता। इसी वजह से बचपन से ही कुपोषण की समस्या के पैर फैला लेती है। इसके लिए महिला बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को घर घर पहुंच कर काम करने के लिए निर्देशित किया है।

कुपोषित बच्चों के के चेहरों पर लौटी मुस्कान: किलकिला शिविर में ईला, जोराडोल, कुनकुरी और किलकिला गांव में कुपोषण की समस्या से जूझने वाले बच्चों के साथ उनके पालकों को भी बुुलाया गया था। नन्हें बच्चों को गरम कपड़े दिए गए तो इन बच्चों के साथ उनके परिजनों के चेहरों पर भी मुस्कान बिखर गई। जनपद के सीईओ भजन साय, डा.जेम्स मिंज, उप अभियंता संतोष नायक, बीईओ राधेश्याम दिवाकर, सुनील कुमार धमिजा ने ग्रामीणों को कुपोषण की समस्या से बचने के उपाय बताए। </>

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