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Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति रायपुर, 01 जनवरी 2018

सूरज की पहली किरणों के साथ आज से घरों के कैलेण्डर बदल गए। नया साल, नई उम्मीदें लेकर आया है। अपने सभी चाहने वालों को चोखेलाल की तरफ से हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामनाएं। हालांकि नए साल को लेकर भी देश बंट चुका है। हिंदुत्व का झण्डा लेकर चलने वाले इसे नया साल नहीं मानते। खैर किसकी क्या सोच है, उस पर विवाद करने के बजाए आज यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि आने वाले बारह महीने, 52 सप्ताह और 365 दिनों में अपने, अपने परिवार और अपने समाज के लिए कुछ ऐसा किया जाए, जो एक नजीर बनकर सामने आए।

नया साल छत्तीसगढ़वासियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यही वह साल है, जिसमें प्रदेश की ढाई करोड़ आबादी अपने अगले साल का भविष्य तय करेगी। सालांत में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में काम करने वाले राजनीतिक दलों के कामकाज का जवाब देने का यही साल होगा। चुनाव हैं तो तय बात है कि गतिविधियां बढ़ेेंगी। सत्तारूढ़ दल के अलावा अन्य राजनीतिक दल भी अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे। हर राजनीतिक दल खुद को जनता के पैमाने पर खरा उतारने की भरपूर कोशिश करेगा। ऐसी स्थिति में प्रदेशवासियों को बेहद होशियारी, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ फैसला करना होगा क्योंकि यह उनके और उनकी आने वाली पीढ़ी के अगले पांच साल  का भविष्य तय करेगा।

अन्य नए सालों के मुकाबले यह नया साल छत्तीसगढ़वासियों के लिए नए सपनों का साल होगा क्योंकि हर राजनीतिक दल उन्हेंं भांति-भांति के सपने दिखाएगा। वह यही बताने की पूरी कोशिश करेगी कि वही छत्तीसगढिय़ों का हमदर्द है, वही वह ताकत है जो छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढिय़ों का सपना पूरा कर सकता है, उनका भविष्य उज्ज्वल कर सकता है। प्रदेशवासियों को सभी की बातों को सुनना होगा और फिर वही तय करना होगा, जो उन्हें उचित लगता है।

सभी जानते हैं कि प्रदेश में सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच में होगा। इस बीच छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस भी मैदान में कूदने की तैयारी कर रही है, जिसके मुखिया का शासनकाल इस प्रदेश ने बेहद करीब से देखा है। मात्र तीन बरस के शासनकाल में इतना अत्याचार किया गया कि प्रदेशवासी मतदान के दिन का इंतजार करने लगे गए थे और जब मौका मिला तो उन्होंने क्या किया, यह बताने की जरूरत नहीं है। प्रदेश की हर गतिविधि में बारीक नजर रखने वालों का दावा है कि 2018 में प्रदेश के हालात ठीक उसी प्रकार हो गए हैं, जो 2003 में हुआ करते थे। सरकार और उसके नुमाइंदों की कार्यशैली से प्रदेशवासी उकता चुके हैं और उन्हें उसी तरह मतदान के दिन की प्रतीक्षा है, जैसी 2003 में थी। आगे बताने की इसलिए जरूरत नहीं है क्योंकि परिणाम सभी जानते हैं।

जानकारों का कहना है कि किसी को शक्तिमान बनाना गलत नहीं है लेकिन अगर उसे सर्व शक्तिमान बना दिया गया तो वह आदमखोर (मेनईटर) बन जाता है। एक ही राजनीतिक दल को चौथी बार सत्ता सौंपने का मतलब शासन-प्रशासन के गलत कामों पर मुहर लगाना है। शासन-प्रशासन ने सभी काम गलत किए हैं, ऐसा नहीं है लेकिन जिस राजनीतिक दल के शासनकाल में महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए गए हों, आंखें फोड़ दी गई हों, गायों की अकाल मौतें हो रही हों, ऑक्सीजन की कमी से नवजात दम तोड़ रहे हों, किसान फांसी पर झूल रहे हों, नक्सली बताकर वनवासियों को गोलियों से छलनी किया जा रहा हो, सरे आम महिलाओं की आबरू लूटी जा रही हो, सरकारी जमीनों पर ओहदेदार कब्जा कर रहे हों, सरकार पर नौकरशाहों के चंगुल में फंसे रहने का लगातार आरोप लग रहा हो और कदम-कदम पर रिश्वत मांगने वाले सुरसा की तरह मुंह फाड़े खड़े हों….उस राजनीतिक दल की सरकार पर फिर भरोसा करने का मतलब है कि इस सब कामों को प्रदेशवासी गलत नहीं मानते और इन सब कामों को करने में उनकी सहमति है।

ऐसा नहीं है कि प्रदेशवासियों ने जिस कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका निभाने का जनादेश दिया था, वह अपने कामों को सही तरीके से कर रही है। कुछ चुनिंदा मुद्दों पर अपनी राजनीति चमकाने के लिए कांग्रेस सड़कों पर जरूर उतरी लेकिन बीते डेढ़ दशकों में प्रदेश  कांग्रेस ने जनहित के किसी भी मुद्दे पर सरकार को परेशान किया हो, ऐसा उदाहरण खोजने से भी शायद ही मिले। आपसी गुटबाजी में उलझी, मेरे-तेरे के चक्कर में पड़ी कांग्रेस गांधी चौक के मैदान से बाहर नहीं निकल पाई है। इन डेढ़ दशकों में सरकार ने तो खूब मुद्दे दिए, भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए या लाए गए लेकिन कांग्रेस किसी भी मुद्दों को लेकर परिणामोन्मुखी लड़ाई नहीं लड़ पाई। इन दोनों राजनीतिक दलों की इस स्थिति के बीच प्रदेश के मतदाताओं की स्थिति बेहद दयनीय है क्योंकि उसके पास विकल्प नहीं हैं। फिर भी प्रदेश के मतदाता बेहद जागरूक और संजीदा हैं इसलिए संभावना तो यही है कि अगले साल का कैलेण्डर आने तक प्रदेश एक सुरक्षित हाथों में पहुंच चुका होगा।

चोखेलाल
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