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Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति रायपुर, 05 जनवरी 2018

आमतौर पर सुर्खियों से दूर रहने वाला बस्तर का एक जिला इन दिनों चर्चा में है। चर्चा के केंद्र बिंदू में उस जिले का भाजपा संगठन है, जिसके प्रमुख पर यौन उत्पीडऩ का गंभीर आरोप लगाया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप लगाने वाली महिला पार्टी की नेत्री है, जो जिला पंचायत की एक बड़ी पदाधिकारी है। रेखांकित करने वाली बात यह है कि महिला उत्पीडऩ के लिए बड़ी लड़ाई लडऩे का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी के सत्ता और संगठन में यह महिला न्याय के लिए दर-दर भटक रही है लेकिन अब तक तो उसे सफलता नहीं मिल पाई है।

पीडि़त महिला पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है और उसके परिवार के कुछ सदस्य छत्तीसगढ़ पुलिस में मुलाजिम हैं। इस महिला का सीधा आरोप है कि जिला भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी उस पर गंदी नजरें रखते हैं और मौका मिलते ही उसे डर्टी टच (आपत्तिजनक स्पर्श) करने से नहीं चूकते हैं। यह सिलसिला लगातार चल रहा है, जिसके बारे में महिला नेत्री ने रायपुर आकर पार्टी के बड़े नेताओं को अवगत कराया है लेकिन मजाल है कि अब तक उस पदाधिकारी का बाल भी बांका हुआ है।

निष्ठा और समर्पण की मिसाल इस महिला से जब चोखेलाल ने बात की तो उसने सभी कुछ बताया लेकिन साथ में यह भी कहा कि उसे अपने पार्टी के बड़े नेताओं पर अटूट भरोसा है। परिवार के मुखिया होने के नाते उसने अपने नेताओं को सबकुछ बता दिया है और उसे पूरा यकीन है कि गंदी नीयत वाले उस बड़े नेता पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। एक तरफ महिला का अपने बड़े नेताओं पर भरोसा और दूसरा तरफ उन बड़े नेताओं के द्वारा इस मामले को गंभीरता से न लेना यह साबित करता है कि भाजपा संगठन गंदी हरकतें करने वालों को संरक्षण देता है।

वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसा किया गया हो। इससे पहले भी राजधानी में एक महिला ने सत्ता और संगठन के कई नेताओं पर चारित्रिक आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उन नेताओं की सीडी उसके पास है। कुछ दिनों के लिए पार्टी में हड़कम्प जरूर मचा लेकिन उसके बाद इस पूरे मामले को राख के नीचे दबा दिया गया। सवाल यह है कि एक महिला जो एक जिम्मदारी वाले पद पर बैठी है, अगर पार्टी के नेता ही उसका उत्पीडऩ करेंगे तो फिर नारी अपनी अस्मिता बचाने के लिए कहां जाएगी।

जिला पंचायत के एक बड़े ओहदे में बैठी महिला अगर सार्वजनिक रूप से खुद के साथ उत्पीडऩ किए जाने का आरोप लगाती है तो प्रदेश भाजपा के नेतृत्वकर्ताओं को कार्रवाई करने में पलभर की देर नहीं लगानी चाहिए क्योंकि कानून में भी यही लिखा है कि अगर कोई महिला अपने साथ गलत व्यवहार करने का आरोप लगाती है तो उसे प्रथमदृष्टया सही मानते हुए आरोपी पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

पर इस मामले में समझ में नहीं आता कि प्रदेश भाजपा के नेतृत्वकर्ताओं के हाथ कहां बंधे हुए हैं। एक तरफ तो महिला को अपने नेताओं पर पूरा भरोसा है और वह पार्टी फोरम से बाहर जाकर कुछ कहने से साफ मना करती है। दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व कार्रवाई करने के लिए न जाने किस बात की प्रतीक्षा कर रही है। अगर यही महिला सीधे मीडिया में चली जाती और वह सब बातें कहती, जो उसने पार्टी फोरम में कहा है तो रायपुर से लेकर दिल्ली तक का भाजपा संगठन कांप उठता और उसके बाद ऐसा करने वाले पर तत्काल कार्रवाई की जाती परंतु पार्टी के अनुशासन से बंधी महिला धैर्य के साथ कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही है।

सत्तारूढ़ दल में महिलाओं के उत्पीडऩ के इस प्रकार के अनेक मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। उत्तर छत्तीसगढ़ से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़ तक भाजपा में काम करने वाली महिलाएं इस प्रकार की घटनाओं से दो-चार होती रहती हैं। कुछ साहस जुटाकर सामने आ जाती हैं लेकिन अधिकतर चुप रहना ही बेहतर समझती हैं। जिला पंचायत की इस महिला पदाधिकारी ने जब अपनी कहानी सुनाई तो उससे सहानुभूति जताने के बजाए पार्टी के बड़े ओहदेदारों ने उसे जिस प्रकार से फटकार लगाई, उसका नजारा जगदलपुर में सौदान-संवाद के दौरान  पार्टी के अधिकतर नेताओं व  कार्यकर्ताओं ने देखा है। महिला जिस तरह पार्टी कार्यालय के सामने बैठकर फूट-फूटकर रो रही थी, उसको देखकर महिलाओं को न्याय दिलाने का दावा करने वालों को शर्म से डूब जाना चाहिए। जो राजनीतिक दल अपनी ही महिला कार्यकर्ता को न्याय नहीं दिला सकता, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है कि प्रदेश की लाखों महिलाओं को वह न्याय दिलाएगा?

महिला आयोग, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे संगठन और नारे बे-मानी साबित हो रहे हैं। सवाल एक महिला का नहीं है। इस महिला पर बात इसलिए हो रही है क्योंकि वह न्याय की गुहार लगाते हुए सामने आई है। ऐसी न जाने कितनी महिलाएं हैं जो न्याय के लिए पुकार नहीं लगा सकतीं या दबंग उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि महिलाओं के  सम्मान और अधिकार के लिए राज्य की भाजपा सरकार जो बातें करती है, उसकी जमीनी हकीकत क्या है, वह बस्तर के इस जिले की जिला पंचायत की पदाधिकारी को देखकर सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है।

चोखेलाल
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