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Chokhelal

मुखिया के मुखारी

इंडिया राइटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति               रायपुर, 14 जनवरी 18

 

मुखिया के मुखारी

व्यवस्था। जब सरकारी हो तो अव्यवस्था बन जाती है और निजी हो तो समुचित हो जाती है। इस बात का सबसे सटीक उदाहरण रायपुर में आयोजित मेगा हेल्थ कैंप में दिखाई दे रहा है। सरकारी की सरकारी व्यवस्था को नियंत्रित करने के जिम्मेदार हाथों में से एक के द्वारा आयोजित यह निजी आयोजन इस बात को बताता है कि सूबे के मंत्रियों को सरकार की छवि से ज्यादा अपनी खुद की छवि की चिंता सताती है।

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल आंबेडकर अस्पताल में जूडॉ मिलाकर 700 से अधिक डॉक्टर हैं, अन्य मेडिकल स्टाफ भी बड़ी संख्या में हैं। करोड़ों रुपए की अत्याधुनिक मशीने लगी हुईं है। स्थापना व्यय ही लाखों करोड़ों का है, लेकिन यह अस्पताल भी एक दिन में इतने एक्सरे, इतने सीटी स्कैन नहीं कर पाता, इतने चश्मे नहीं बांट पाता, जितने एक्सरे, सीटी स्कैन इस मेगा हेल्थ कैंप में एक दिन में हो गए, जितने चश्मे यहां एक दिन में बंट गए। आंबेडकर अस्पताल में मरीज इलाज न मिलने की शिकायत करते रहते हैं, ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से नौनिहालों की मौत हो जाती है, एक दिन में 4 बच्चों की मौत हो जाती है। विशेषज्ञों की कमी का रोना रोया जाता है। सरकार को सोचना चाहिए कि क्यों इतनी सुविधाएं होते हुए भी उसका यह अस्पताल एक दिन में उतने लोगों को क्यों संतुष्ट नहीं कर पाता जितने लोगों को कोई हेल्थ कैंप कर दे रहा है। इसके पीछे कारण है इच्छाशक्ति की कमी और स्व की ज्यादा चिंता।

यह स्व की चिंता ही है कि मांगीलाल-भीखमचंद कहे जाने वाले मंत्री सरकार की छवि से ज्यादा अपनी उस छवि को सुधारना चाहते हैं जो कभी नहीं सुधर सकती, जिस तरह से उनका खटारा स्कूटर आखिर तक खटारी ही रहा था। सरकार की छवि की चिंता होती तो अव्यवस्थाओं से भरे अपने विभाग में पहले व्यवस्था लाते, हेल्थ कैंप आयोजित करने की बजाय सरकारी अस्पतालों की चिंता करते। क्योंकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस तरह के हेल्थ कैंप में क्यों लोग पहुंचते हैं। इसलिए कि उन्हें जो चाहिए वह सरकारी अस्पताल मुहैया नहीं करवा पा रहा। यह एक ऐसा प्वाइंट है जिसे कभी न यह मंत्री समझ पाए न ही सरकार।  इस हेल्थ कैंप में भाजपा के पार्षद और कार्यकर्ता कंपाउंडर और नर्स की भूमिका निभा रहे हैं, वे अपने वार्ड में बीमार गरीब को अस्पताल भिजवाने की व्यवस्था भी नहीं करते। शहर की 4 धर्मशालाएं इस हेल्थ कैंप के लिए बुक हैं। चोखेलाल को किसी ने बताया कि इस हेल्थ कैंप के “आयोजकों” पर आयकर की नजर गड़ी हुई है। शहर की कुछ खास पान दुकानों में तो यह भी सुना गया कि इन्हीं मंत्री को स्वास्थ विभाग की जिम्मेदारी दे देनी चाहिए तब देखते हैं कैसी व्यवस्था और अव्यवस्था रखते हैं।

यह हकीकत है कि लोगों के स्वास्थ्य से ज्यादा अपनी छवि और चुनाव की चिंता है। इसी चिंता के चलते गालियों वाली जुबान में मिठास लाने की कोशिश की जा रही है, अकड़ी हुई रीढ़ को झुकने की आदत सिखाई जा रही है।

लेकिन

ये जो पब्लिक है सब जानती है

अजी अन्दर क्या है, बाहर क्या है

ये सब कुछ पहचानती है

चोखेलाल

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