Chhattisgarh Korba Raipur

प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया छेरछेरा, जाने पहले और अब में क्या है फर्क…

रायपुर/ कोरबा: प्रदेश में अन्नदान का महापर्व छेरछेरा धूमधाम से मनाया गया. गांवों से लेकर शहरों तक की गलियों में हाथों में थैले लिए बच्चों की टोलियां हर घर के दरवाजे पर पहुंचते ही बच्चे आवाज लगाते हैं छेर-छेरा मार्ई कोठी के धान ला हेर-हेरा. और माताएं और बहनें अपने घरों से धान लाकर बच्चों को देती हैं.

हमारे संवाददाता ने छेरछेरा में अन्नदान लेने निकली कोरबा जिले के कोरकोमा गाँव के बच्चों की टोली से बातचीत की. बच्चों ने कहा कि वे हर साल छेरछेरा में धान लेने जाते हैं. इसके बाद शाम को उसे बेंचकर उससे आए पैसों से अपने जरूरत की सामान खरीदती है.

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी:
कोरबा जिले कोरकोमा निवासी उमेश चौधरी ने कहा कि हमारी संस्कृति में अन्नदान का विशेष महत्व है. इस महापर्व को धान की फसल हो जाने के बाद खुशी के तौर पर मनाया जाता है. रामचरित मानस के दोहे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में तुलसीदास ने लिखा है कि- दान किए धन ना घटै जौ सहाय रघुवीर.

इसके अलावा तीरथ लाल राठिया ने उनके ही हां में हां मिलाते हुए कहा कि हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा  दान है.

भूपेंद्र राठौर ने कहा कि गांवों में आज भी इस दिन लोग घरों पर जाकर धान मांगते हैं.

अब नहीं रही पहले जैसी रौनक: लम्बोदर चौधरी
कोरकोमा के पंच लम्बोदर चौधरी ने कहा कि अब त्यौहारों में पहले जैसी रौनक नहीं रही. अपने बचपन को याद करते हुए चौधरी ने कहा कि हम लोग तो कई -कई बार अपने थैलों को खाली करने घर जाते थे. लोग भी खुशी-खुशी धान दिया करते थे.

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