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Chhattisgarh

राज्य स्थापना दिवस पर प्रभुदेवा बिखेरेंगे जलवा

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्थापना के सालाना जलसे में इस बार सुप्रसिद्धि कोरियोग्राफर और डॉसर प्रभुदेवा अपना जलवा बिखरेंगे। इस कार्यक्रम खास बात यह रहेगी कि वे छत्तीसगढ़ के एक हजार पंथी कलाकार के साथ थिरकते नजर आएंगे। राज्योत्सव के मंच पर प्रभुदेवा की कोरियाग्राफी में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से चयनित 1000 पंथी कलाकारों को परफारमेंस का पहली बार होने जा रहा है। इसके लिए संस्कृति विभाग ने प्रदेश के 27 जिलों से पंथी कलाकारों के चयन के लिए आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दीपावली के बाद प्रदेशभर से प्राप्त आवेदनों को इकट्ठा कर कलाकारों का चयन पुरखौती मुक्तांगन में एक बड़ा आडिशन होगा। इसमें कम से कम एक हजार कलाकार का चयन कर उन्हें पंद्रह दिनों तक राज्योत्सव के मंच पर राष्ट्रपति के सामने पंथी नृत्य की सामूहिक प्रस्तुति के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि गरिमामय समरोह में सामूहिक पंथी नृत्य प्रस्तुति के दौरान लय व ताल पर थिरकन में किसी तरह की चूक ना हो।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 1 से 5 नवंबर तक पांच दिवसीय राज्योत्सव नया रायपुर में आयोजित होगा। इसका शुभारंभ 1 नवंबर को उप राष्ट्रपति वेकैंया नायडू करेंगे। 5 नवंबर को समापन समरोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल नई दिल्ली में हुए वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल में पहली बार छत्तीसगढ़ के एक हजार पंथी कलाकारों ने 5 मिनट 36 सेकंड का नानस्टाप पंथी नृत्य परफारमेंस देकर जबरदस्त धूम मचाई। यह कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर महाराज की पहल पर आयोजित किया गया। 72 देशों के लोगों ने लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से छत्तीसगढ़ के एक हजार पंथी कलाकारों को एक साथ एक रिदम पर लोक नृत्य पंथी में लोक वाद्य की थाप पर थिरकते देखा।

छत्तीसगढ़ी गायिका ममता चंद्राकर, छालीवुड के सिने अनुज शर्मा अपनी टोली के साथ राज्योत्सव में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करने आमंत्रित रहेंगे। इसी तरह अंचल के जाने-माने सूफी भजन गायक पद्मश्री भारती बंधु को राज्योत्सव में संत कबीर के भजनों की प्रस्तुति देने आमंत्रित किए जाने की तैयारी है। मशहूर अंतर्राष्ट्रीय पंडवानी गायिका तीजनबाई की पंडवानी न सुनने का मलाल दर्शकों को रह सकता है। तीजनबाई का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं चल रहा है। इस वजह से राज्योत्सव के कार्यक्रम में प्रदेशवासियों को पंडवानी सुनाने आ पाएंगी या नहीं, यह अभी तक तय नहीं है।

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