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तेंदूपत्ता कारोबारियों के साथ गिरोहबंदी करके रमन सिंह सरकार ने किया 300 करोड़ का घोटाला : कांग्रेस

रायपुर: छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने तेंदूपत्ता कारोबारियों के साथ गिरोहबंदी करके इस बार तेंदूपत्ता की नीलामी में भारी धांधली की है जिसकी वजह से लघु वनोपज कोऑपरेटिव फेडरेशन को 300 करोड़ से अधिक का नुकसान होने जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनावी वर्ष में कारोबारियों से 100 करोड़ रुपयों का चंदा उगाहने के लिए रमन सिंह सरकार ने यह गिरोहबंदी की है और आशंका है कि इसका कुछ हिस्सा जंगलों के भीतर भी भेजा जाएगा।

कांग्रेस ने मांग की है कि नीलामी तुरंत रद्द करके नए सिरे से नीलामी की जाए. और कारोबारियों की गिरोहबंदी और इसमें अफसरों और भाजपा सरकार की भूमिका की हाईकोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, और कोडांगांव विधायक मोहन मरकाम तथा कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शिशुपाल सोरी के साथ एक पत्रवार्ता को संबोधित करते हुए कहा है कि सरकार चुनावी फायदे के लिए गरीब आदिवासी और अन्य तेंदूपत्ता मजदूरों का नुकसान करने जा रही है. उन्होंने कहा है कि अगर इस साल कम पैसे आएंगे तो अगले साल बोनस कम बंटेगा लेकिन रमन सिंह जी इससे चिंतित नहीं हैं क्योंकि तब तक चुनाव निपट चुके होंगे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की सरकार चतुराई से गरीब तेंदूपत्ता मजदूरों का नुकसान कर रही है क्योंकि इस वर्ष तो वे पिछले साल का पैसा बोनस के रूप में बांट देंगे और अगले साल जब उनकी सरकार जा चुकी होगी तो कम बोनस देने के नाम पर राजनीति करेंगे. उन्होंने बताया कि ऐसा वर्ष 2013 के चुनावी वर्ष में भी किया गया था जब फेडरेशन को 284 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था।

उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ देश के कुल तेंदूपत्ता उत्पादन का 20 प्रतिशत पैदा करता है और यहां का तेंदूपत्ता सबसे अच्छी क्वालिटी का माना जाता है। तेंदूपत्ता तोड़ने और उसके संग्रहण के लिए अग्रिम निविदा यानी एडवांस टेंडर बुलाती है और इसी के आधार पर भुगतान होता है. इस बार रमन सिंह की भाजपा सरकार ने इसी अग्रिम टेंडर में कारोबारियों के साथ मिलकर बड़ा घोटाला किया है. अगर टेंडर को ध्यान से देखें तो पिछले साल की तुलना में 51-52 प्रतिशत तक कम रेट के टेंडर डाले गए हैं और उनकी बोली मंजूर भी हो गई है। घोटाले की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण के कुल 951 सेक्टर या यूनिट बांटे गए हैं, इनमें से अभी दो लॉट के टेंडर हुए हैं. पहले लॉट में फेडरेशन को पिछले साल की तुलना में 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है और दूसरे लॉट में करीब 85 करोड़ का. तीसरे लॉट का टेंडर होना बचा है, वो भी इसी तरह हुआ तो यह घोटाला 300 करोड़ से बहुत अधिक का हो जाएगा. यह घोटाला मुख्यमंत्री रमन सिंह की मंजूरी के बिना संभव नहीं दिखता और जाहिर तौर पर इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री और अफसरों को मोटी रकम मिलने वाली है।

कैसे हुआ घोटाला

किसी भी सामान की बिक्री के लिए सामान्य रूप से एक न्यूनतम मूल्य तय किया जाता है, जिसे बेस प्राइस कहते है। लेकिन रमन सिंह सरकार ने आज तक तेंदूपत्ते का बेस प्राइस तय नहीं किया है. इससे तेंदूपत्ता कारोबारियों को मनमाना कीमत लगाने की छूट मिलती है और वे औने पौने दाम पर भी सर्वोत्तम क्वालिटी का तेंदूपत्ता खरीदकर भारी भरकम मुनाफा कमाते हैं. इस बार भी यही हुआ है. पहले लॉट के टेंडर में बोली 51 प्रतिशत तक नीचे गई है और कुल मिलाकर पिछले साल की तुलना में 26.84 प्रतिशत कम में तेंदूपत्ता बिका है. दूसरे लॉट में बोली 52 प्रतिशत तक नीचे गई है और औसतन 34.60 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।

उन्होंने बताया कि एक तकनीकी दिक्कत यह है कि हर बोली लगाने वाले से एक रक्षित निधि यानी अर्नेस्ट मनी ली जाती है. और बोली लगाने वाला अर्नेस्ट मनी का 12.5 गुना तेंदूपत्ता ही उठा सकता है. इस तकनीकी प्रावधान की वजह से कई जगह ऐसा हुआ है कि बोली तो अधिक की लगी लेकिन कोटा पूरा हो जाने की वजह से तेंदूपत्ता बेभाव बिक गया. इससे भी फेडरेशन को बड़ा नुकसान हुआ।

क्या नुकसान होगा

तेंदूपत्ता मजदूरों को तोड़ाई के समय न्यूनतम मजदूरी दी जाती है और बाद में कुल आय की 80 प्रतिशत राशि बोनस के रूप में बांटी जाती है. तेंदूपत्ता की इस साल बोली कम लगने से फेडरेशन को कम पैसा मिलेगा और इससे उनको मिलने वाला बोनस कम हो जाएगा. चरण पादुका बांटने से लेकर बीमा योजना और छात्रवृत्ति योजना भी इसी पैसे से चलती है. जाहिर है कि जब कम पैसा होगा तो लोगों को मिलने वाला लाभ भी कम हो जाएगा और इस तरह तेंदूपत्ता मजदूर ऐसे अपराध के लिए सजा भुगतेंगे जो उन्होंने नहीं किया या जिसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।

कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा सरकार ने पहले ही लघु वनोपज के समर्थन मूल्य में कटौती करके आदिवासियों के साथ बड़ा अन्याय किया है और अब वे तेंदूपत्ता मजदूरों के साथ भी धोखा कर रहे हैं।

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