Chhattisgarh India Raipur

41 शिक्षाकर्मी नेता बर्खास्त, 17 हजार प्रेरकों को पढ़ाने का निर्देश

रायपुर : जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा। तासु दून कपि रूप देखावा | अर्थात जैसे जैसे सुरसा अपना शरीर बढ़ा रही थी वैसे वैसे भगवान हनुमान भी अपना शरीर बढ़ा रहे थे. ठीक इन दिनों छत्तीसगढ़ सरकार और शिक्षाकर्मियों के बीच देखने को मिल रहा है. जैसे जैसे प्रदेश के शिक्षाकर्मी अपने आन्दोलन को तेज कर रहे है ठीक उसी तरह सरकार भी अपना सख्त रुख अपना रही है. पिछले कई दिनों से अपने अधिकार और सम्मान के लिए आंदोलनरत शिक्षाकर्मियों के साथ अब सरकार ने सख्ती से निपटने का फैसला किया है. प्रमुख सचिव और डीजीपी ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत सी.ई.ओ के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए है. प्रमुख सचिव ने बैठक में साफ निर्दश कर दिया है कि अब शिक्षाकर्मियों के साथ सख्ती से निपटा जाये. इसके अलावा बैठक में 41 शिक्षाकर्मियों नेताओं को बर्खास्त करने के आदेश दिए गए हैं. जानकारी के मुताबिक सभी कार्रवाई जिला स्तर पर होगी. आपको बता दें कि शिक्षाकर्मियों और सरकार के बीच लगातार बातचीत असफल होने के बाद शिक्षाकर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. वहीँ पुलिस भी उनके आन्दोलन को खत्म करने लगातार कोशिश कर रही थी लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे. ऐसे में अब प्रमुख सचिव विवेक ढांड और डीजीपी ए.एन उपाध्याय ने संयुक्त बैठक लेकर शिक्षाकर्मियों से कड़ाई से निपटने के निर्देश दिए हैं. वहीँ प्रदेश के सभी स्कूलों में 17 हजार प्रेरकों को पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा हड़ताली शिक्षाकर्मियों को सेंट्रल जेल में डालने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को मिले हैं.

कांग्रेसी गिरफ्तार

कांग्रेस ने शिक्षाकर्मियों की मांग को जायज बताते हुए 5 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया था. ऐसे में प्रदेश बंद के एक दिन पहले प्रशासन सख्त हो गई है. इसी कड़ी में बंद के लिए व्यापारियों से समर्थन मांगने निकले कांग्रेस के नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष विकास उपाध्याय के अलावा करीब दो दर्जन कांग्रेसी नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सभी कांग्रेसी शहर अध्यक्ष विकास उपाध्याय के नेतृत्व में व्यापारियों को समर्थन पत्र भेंटकर बंद के लिए समर्थन मांग रहे थे। कांग्रेस के नेता मालवीय रोड, एमजी रोड और पंडरी कपड़ा मार्केट में व्यापारियों से मिलकर कल अपनी-अपनी दुकानों को बंद करने की अपील कर रहे थे। लेकिन कांग्रेस भवन से निकलते ही गांधी मैदान के पास कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया

पुलिस के साथ लुकाछुपी का खेल

राजधानी रायपुर इनदिनों पुलिस और शिक्षाकर्मियों के लिए मानों लुकाछिपी का खेल खेलने की जगह बन गई हो. पिछले कुछ दिनों से शिक्षकों और पुलिस के बीच लुकाछिपी ही चल रहा है. शिक्षाकर्मी अपनी रैली निकालने में आमद है तो वहीँ पुलिस भी उनकी रैली को नहीं निकलने देने के लिए तैयार खड़ी है. इसी कड़ी में पिछले दो दिनों से पुलिस शिक्षाकर्मियों को पकड़ने में लगी है बावजूद इसके शिक्षक पुलिस को चकमा देकर किसी न किसी तरह से मैदान में पहुचकर आन्दोलन कर रहे हैं. इसी सिलसिले में दोनों मैदानों में अनुमति नहीं मिलने के बाद आज शिक्षाकर्मी एनआईटी गेट के सामने बैठ गएँ इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क ही जाम कर दिया. शिक्षाकर्मी सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया. वहीँ पुलिस उन्हें समझाइश देकर सड़क से हटाने में जुटी रही.

वीडियो कान्फेंसिंग में मुख्य सचिव ने सीईओ से क्या-क्या पूछा :

वीडियो कांफ्रेसिंग कर प्रदेश के मुख्य सचिव विवेक ढांड ने शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की वास्तविक जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की वजह से कितने ऐसे स्कूल प्रभावित होंगे? कितनी ऐसी शालाएंं हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है? वहां कैसे पढ़ाई हो रही है? अर्धवार्षिक परीक्षा को लेकर क्या विकल्प किये गये हैं? बमुश्किल 2 से 4 मिनट में सभी जिलों से ये पूछ लिया गया कि आखिरकार शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से पढ़ाई और स्कूल कितने प्रभावित हो रहे हैं? मुख्य सचिव ने कहा कि मंगलवार से प्रदेश के सभी सत्रह हजार प्रेरक शालाओं में जाकर शिक्षा देंगे।

 

शिक्षाकर्मियों को डाला जाएगा केंद्रीय कारागार में

वहीं शिक्षाकर्मियों को अब अस्थायी जेल के बजाय सेंट्रल जेल और जिला जेल में भेजने का निर्देश दिया गया है।

चीफ सेक्रेटरी ढांड ने दो टूक लहजे में कहा कि किसी भी कीमत पर स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

20 हजार शिक्षाकर्मी लौटे

मुख्य सचिव को जानकार अधिकारियों ने बताया कि अब तक लगभग 20 हजार से ज्यादा शिक्षाकर्मी लौट चुके हैं। 7 हजार हड़ताल से आज ही लौटे हैं।

 

150 से ज्यादा शिक्षाकर्मी नेता गिरफ्तार

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री विजय कुमार झा ने कहा कि सरकार वार्ता की बात करती है। हमारे सारे नेता जेल में हैं तो ऐसे में उनके बिना रिहा हुए हम वार्ता कैसे कर सकते हैं? कौन करेगा वार्ता? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक डेढ सौ से ज्यादा नेता जेल में बंद हैं।

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