Chhattisgarh Durg-Bhilai

शो पीस बना 14 लाख का शौचालय, न बिजली न पानी का पता

निगम अधिकारियों की लापरवाही, नहीं होती शिकायतों की सुनवाई

भिलाईनगर। 14 लाख की लागत से बना शौचालय महज शो पीस बन कर रह गया है। यहाँ न बिजली का पता है न पानी का ठिकाना। टायलेट इस्तेमाल के पहले देखना पड़ता है कि, पानी है या नहीं, अन्यथा दूसरे टायलेट जाना होता है। जब तक पानी रहता है शौचालय खुला रहता है, पानी खत्म होते ही कर्मचारी दरवाजे पर ताला लगा कर गायब हो जाता है। इसके बाद लोग खुले में ही शौच जाते हैं।

स्वच्छता सर्वेक्षण करने आई दिल्ली की टीम को दिखाने नगर निगम ने वार्ड 37 बैरागी मोहल्ला में 14 लाख रुपए खर्च कर सार्वजनिक शौचालय तो बना दिया, लेकिन डेढ़ साल बााद भी वहाँं पानी की स्थाई व्यवस्था नहीं कर सका है।  रोज शाम को एक ट्रैक्टर टैंकर से चार हजार लीटर पानी शौचालय की टंकी में स्टोर कर दिया जाता है। जब तक पानी रहता है शौचालय खुला रहता है, पानी खत्म होते ही कर्मचारी दरवाजे पर ताला लगा देता है। इसके बाद फि र लोग खुले में ही शौच के लिए जाते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन पर पलीता

नगर निगम प्रशासन खुले में शौचमुक्त शहर का दावा भले ही करे मगर हकीकत कुछ और है। निगम के अधिकारी ही भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन पर पलीता लगा रहे हैं। तभी तो पॉवर हाउस बस स्टैंड के पास बैरागी मोहल्ला में बने सार्वजनिक शौचालय में अभी तक नल कनेक्शन नहीं पहुंँचा पाए हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के अंतर्गत दिल्ली से सर्वे करनेे आई क्यूसीआई की टीम को दिखाने के लिए निगम ने रंग रोगन कर शौचालय को लोगों के उपयोग के लिए खोला। नल कनेक्शन नहीं होने पर टैंकर से पानी सप्लाई की व्यवस्था की। टीम चली गई और निगम भी पानी की स्थाई व्यवस्था करना भूल गया।

महिलाओं ने कई बार शिकायत की

बैरागी मोहल्ला की महिलाओं ने कई बार शिकायत की बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। वार्ड के सुमनशील का कहना है कि, निगम ने मार्केट क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान के लिए शौचालय तो बनवाए हैं, लेकिन कुछ अधिकारियों की लापरवाही की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है।  लोग खुले में शौच के लिए विवश हैं। नरेन्द्र, सुनील, अतीश, कौशल्या का कहना है कि, गेट सुबह 9 बजे खुलता है और शाम 5 बजे बंद कर दिया जाता है।

पानी ना बिजली, निगम ने शौचालय कैसे आधिपत्य में ले लिया

सवाल यह है कि, पानी की व्यवस्था के बगैर निगम ने ठेकेदार से शौचालय को हैंड ओवर कैसे ले लिया। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सामुदायिक शौचालय भवन निर्माण में पानी और प्रकाश की व्यवस्था अनिवार्य है। इसे ठेकेदार पूरा करेगा। इसी शर्त पर 14-14 लाख की लागत से चार स्थानों पर सार्वजनिक सह सामुदायिक शौचालय निर्माण का ठेका दिया गया था।

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