Chhattisgarh Sukma Tribal

सुकमा में देवी के चढ़ाए फूल से बीज निकालकर कर रहे गेंदे की खेती, 70-80 हजार रुपए कमा रहीं महिलाएं

कोंडागांव : माता मंदिर में रोज गेंदे के फूल चढ़ाने के बाद चार महिलाएं मंदिर के पुजारी से बात करने बैठ जातीं। एक दिन पुजारी जयमन ने बातों-बातों में उन्हें गेंदे की खेती करने की सलाह दी । सभी के खेत आपस में जुड़े थे जिससे वे सामूहिक रूप से खेती कर सकती थीं।

बात आगे बढ़ी तो मां को चढ़ाए फूल को पुजारी ने उन्हें दे दिए यह कहकर कि इन्हें सूखाकर बीज निकाल लें और खेतों में बोकर इसकी देखभाल करें। इन महिलाओं ने ऐसा ही किया। आज वे प्रति एकड़ 70- से 80 हजार रुपए कमा रही हैं।

मन में कुछ करने की लालसा और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो हर काम सफल होता है। इस कहावत को चरितार्थ करने का काम इन दिनों जिले के मैनपुर की चार महिलाएं रेखा बाई, पदमनी, लच्छनी और श्यामबती कर रही हैं।

गाँव की महिलाएं बनी मिसाल ; 

कोंडागांव से 65 किमी दूर मैनपुर की ये महिलाएं घर के कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारी को निभाते हुए इन दिनों पांच एकड़ में गेंदे फूल की खेती कर प्रति एकड़ 70-80 हजार रुपए कमा रही हैं। सिंचाई और देखरेख के कारण उम्मीद से ज्यादा उत्पादन हुआ। रेखा बाई, पदमनी, लच्छनी और श्यामबती ने कहा कि तीन साल से गेंदे की खेती कर रही हैं। कम मेहनत में अच्छी आमदनी हो रही है।

पिछले साल प्रति एकड़ 80 हजार रुपए की आमदनी हुई थी। महिलओं ने कहा कि वे गेंदे के फूलों की खेती करेंगी इसके बारे में कभी सोचा नहीं था। घर की बाड़ी में पूजा के लिए ही फूल लगाए जाते थे। परिवार वालों के कहने पर इसकी योजना बनाकर यह काम शुरू किया गया। जिसमें अब तक उम्मीद से ज्यादा सफलता मिल रही है।

साग सब्जी उगाने किया जायेगा प्रोत्साहित ; 

उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक कमलेश कुमार साहू ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को अब साग सब्जी के साथ फूलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम भी आने शुरू हो गए हैं। यहां से फूल अन्य शहरों में जा रहे हैं। समय-समय पर उन्हें तकनीकी जानकारी और विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए इसका लाभ लेने के लिए कहा जा रहा है। गांव की मिट्टी गेंदे के फूल की खेती के लिए उपयुक्त है।</>

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