Chhattisgarh Raipur

प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रभावित व शोषित आदिवासी वर्ग : टीएस सिंहदेव

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार विकास यात्रा निकालकर प्रदेश में तथाकथित विकास का ढिंढोरा पीट रही है तथा राज्य के अंतिम छोर के व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का दावा कर रही, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि राज्य के अंतिम छोर के व्यक्ति को विकास से दूर रखा गया है। जिन आदिवासियों के नाम पर भाजपा सरकार में आई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रभावित व शोषित आदिवासी वर्ग ही है।

मुआवजा भुगतान किया जाए

बस्तर जिलांतर्गत तहसील जगदलपुर के ग्राम नगरनार के ग्रामीणजनों के स्वामित्व की भूमि को सरकार ने अधिग्रहित कर जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र,जगदलपुर के माध्यम से नगरनार स्टील प्लांट को दिया। जबकि भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा के ऐसे अनेक प्रकरण आज भी लंबित है। लंबित प्रकरणों में से एक पर 30 नवंबर 2016 को माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने प्रभावितों के हितों की रक्षा करते हुए यह स्पष्ट आदेश दिया कि तीन महीने के भीतर बंदोबश्त सूची में त्रुटि सुधार कर प्रभावितों के नाम रिकॉर्ड में डाले जाए एवं आगामी 6 माह के भीतर, भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत कार्यवाही कर, मुआवजा भुगतान किया जाए।

 प्रभावितों के स्वामित्व की भूमि का फौरी तौर पर मुआवजा दिया

किन्तु सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए प्रभावितों के स्वामित्व की भूमि का फौरी तौर पर मुआवजा दिया किन्तु भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत न तो अधिग्रहण की कार्यवाही कीऔर न ही उसके आधार पर मुआवजा का निर्धारण किया गया।
वर्तमान में प्रभावी भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रभावितों को उनकी स्वामित्व की भूमि का कई गुना मुआवजा मिलना चाहिए। फलस्वरूप बस्तर के प्रभावितों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में अवमानना का प्रकरण दर्ज किया,जिस पर माननीय न्यायालय ने, सरकार की ओर कलेक्टर,बस्तर को 11 मई 2018 को माननीय न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है, किन्तु कलेक्टर, ने बस्तर में विकास यात्रा 2018 का हवाला देकर,न्यायालय में उपस्थिति से छूट मांगी है,जो कि निश्चत रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे अनेक मामले सामने आ सकते है।

 सरकार ने पूरी सरकारी मशीनरी अपने राजनैतिक प्रचार में झोक दी

राज्य सरकार अपनी विकास यात्रा बस्तर से प्रारंभ कर रही है। ये कैसी विकास यात्रा है ? सरकार ने पूरी सरकारी मशीनरी अपने राजनैतिक प्रचार में झोक दी है। विकास का अर्थ है लोगों के काम करना,जबकि स्थिति यह है कि आम नागरिक,आदिवासी,वनवासी अपने कामों के लिए भटक रहे है और सरकारी जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि,वो विकास यात्रा के निपटने के बाद आम नागरिकों का काम कर पायेंगे। आम जनता दफ्तरों के चक्कर लगा रही है,और पूरी सरकार विकास यात्रा निकालने में व्यस्त है,-मस्त है,वह भी जनता के पैसे खर्च करके।

 सरकारी अमले का दुरुपयोग

प्रदेश की आम जनता देख रही है कि भाजपा सरकार कैसे सरकारी धनराशि और सरकारी अमले का दुरूपयोग अपने प्रचार में कर रही है। सरकार का काम है कि, अंतिम छोर के व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़े।  किन्तु अंतिम छोर के व्यक्ति तक सरकार स्वयं ही पहुंचना नहीं चाहती।  यह स्पष्ट है। आने वाला विधानसभा चुनाव ही यह तय करेगा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में विकास किया? अथवा केवल विकास का प्रचार किया ?

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