Chhattisgarh Gariaband

मेरे पतिदेव को आज तक कृषि विभाग ने जिंदा रखा क्यों

 हम लोगों ने तो पांच साल पहले कफऩ दफन कर दिया है।

छुरा । किसानों के नाम पर शासकीय योजनाओं का भरपूर लाभ शासकीय कर्मचारी अधिकारी की मिलीभगत से योजनाओं का बंदरबांट गरियाबंद जिले में किया गया है, चाहे सूखा राहत राशि के नाम पर हो या कृषि विभाग द्वारा सूखा प्रभावित किसानों को नि शुल्क धान बीज वितरण के नाम पर , छुरा ब्लाक के कमार जाति के लोगों का नाम सूखा प्रभावित किसानों की सूची में पटवारी द्वारा जोड़ कर आधे राशि की वसूली की गई , कृषकों ने धान की फसल लगाया ही नहीं था जिनका सूखा प्रभावित में जोड़ कर वसूली किया गया आधा तेरा आधा मेरा की तजऱ् पर ऐसा न्यायब तरीका अपनाया गया और शासकीय खजाना को लूटने में लगे हैं। गरियाबंद जिले का कृषि विभाग भी भ्रष्टाचार करने में किसी भी तरह से कोई कमी नहीं करता है जिंदा को मुर्दा ओर मुर्द को जिंदा बताकर शासकीय योजनाओं का भरपूर इस्तेमाल करने में अपना शान समझते हैं,

वर्ष 2016 में सूखाग्रस्त इलाकों के कृषकों को शासन ने नि शुल्क धान बीज वितरण करने के लिए निर्णय लिया जिसके चलते अनेकों कृषकों के नाम पर बीज वितरण कागजों में बता दिया गया शासन को कृषकों की सूची भी दें दिया गया कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को कृषि विभाग के द्वारा धान बीज वितरण किया गया अब किसानों को सूखे से राहत मिल गई । जब आरटीआई कार्यकर्ता मनोज सिंह ठाकुर के द्वारा लिये गये दस्तावेजों के बाद गांवों में पता करने पर पता चला कि जिस कमाल जाति के लोगों को शासकीय योजनाओं के तहत धान बीज वितरण किया गया है वह किसान वर्ष सात जनवरी 2013 में अपने घर परिवार संगे संबंधी नाते रिश्तेदारों गांव छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए चला गया है, लेकिन कृषि विभाग आज भी मृतक दयाराम सोरी जाति कमाल पिता चमरु राम साटिन बरभाठा परसुली को आज भी जिंदा रखा हुआं है क्योंकि मृतक कृषक के नाम पर योजनाओं का लाभ अधिकारी कर्मचारी उठा रहे हैं।सूखा प्रभावित कृषकों की प्रथम पूरक सूची 2016के सीरीज क्रमांक 17मे दयाराम सोरी जाति कमार का नाम वितरण सूची में शामिल हैं।जिसे धान बीज वितरण बताया गया है। इस संबंध में मृतक के पत्नि सुमित्रा बाई शोरी जाति कमार ने बताई कि मेरा सुहाग उजडं गया है साहब मेरे पतिदेव मालिक इस दुनियां में नहीं है साहब वो कृषि विभाग से कभी भी धान बीज नहीं उठाया है न ही हम लोग उठाये है न ही कृषि विभाग ने हमारे घर में भी लाकर नहीं दिया है। ऐसा क्यो कहते हो साहब ये लो मृत्यु प्रमाण पत्र मेरा पति धान बीज नहीं उठाया हैं

अब तो विश्वास हुआ न कृषि विभाग अभी तक जिंदा क्यो रखें है मेरे पति देव को उसका क्रिया- कर्म कब तक कर देंगे ? कृषि विभाग में एक नहीं अनेक मुर्दा आज भी जिंदा है जब तक मुर्दा जिंदा रहेंगे तब तक इन भ्रष्ट लोगों के घरों में कीमति टाईल्स चमकती रहेगी , कृषि विभाग के तीन माह में तीस से अधिक घोटाले का खुलासा सार्वजनिक स प्रमाण सहित हो जाने के बाद पूरा मामला ठंण्डे बस्ते में पड़ा हुआ है आखिर कृषि विभाग का भ्रष्टाचार इतना बड़ा है कि बड़े अफसरों के भी हाथ बंधे हुए हैं जिसके चलते कार्यवाही के लिए कलम की स्याही सुख चुकी है, या जिले का पूरा सिस्टम एक ही टकसाल में ढला हुआ है। विकास यात्रा में मुख्यमंत्री को जि़ले में भ्रष्टाचार की फाईल भेंट की जायेगी ।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर एस ठाकुर गरियाबंद: दयाराम जि़ंदा है तभी योजनाओं का लाभ दिया गया है मृत होता तो कैसे लाभ मिलता ।

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