बाबा भोरमदेव की कांवड़ यात्रा: आस्था के बढ़ते कदम, अब स्थायी व्यवस्था की जरूरत -दुबे

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कवर्धा टेकेश्वर दुबे  :भोरमदेव में उमड़ती कांवड़ियों की भीड़ केवल श्रद्धा का दृश्य नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक बड़ा संदेश भी है। सावन में दूर-दूर से हजारों कांवड़िए पवित्र जल लेकर भगवान भोरमदेव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या यह बताती है कि भोरमदेव अब केवल एक स्थानीय धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

ऐसे में अब सवाल केवल इतना नहीं होना चाहिए कि इस वर्ष कांवड़ियों के लिए क्या व्यवस्था की गई, बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि अगले पांच-दस वर्षों में बाबा भोरमदेव की बढ़ती धार्मिक गतिविधियों के लिए हम कैसी स्थायी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं?

कांवड़ियों की सुविधा के लिए भोरमदेव आने वाले प्रमुख मार्गों पर कांवड़िया सेवा केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। इन केंद्रों पर पेयजल, चिकित्सा सुविधा, विश्राम, शौचालय, प्राथमिक उपचार, भोजन तथा आवश्यक जानकारी की व्यवस्था हो। यात्रा के दिनों में यातायात को सुचारु रखने के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था और आवश्यकता के अनुसार कांवड़ियों के लिए सुरक्षित पैदल मार्ग भी विकसित किया जाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी व्यवस्थाएं केवल सावन के दिनों तक सीमित न रहें। भोरमदेव के लिए एक स्थायी धार्मिक पर्यटन एवं कांवड़ यात्रा प्रबंधन योजना तैयार होनी चाहिए, जिसमें प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्थानीय नागरिक, व्यापारी और धार्मिक संस्थाएं भी सहभागी बनें।

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बाबा भोरमदेव की पहचान जितनी बढ़ेगी, यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी उतनी ही बढ़ेगी। यह क्षेत्र स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। इसलिए कांवड़ियों को केवल भीड़ के रूप में नहीं, बल्कि बाबा भोरमदेव की धार्मिक पहचान को देशभर तक पहुंचाने वाले श्रद्धालु और अतिथि के रूप में देखना होगा।

जरूरत इस बात की है कि बाबा भोरमदेव में आने वाला प्रत्येक कांवड़िया यहां से केवल जलाभिषेक की संतुष्टि लेकर न लौटे, बल्कि सुव्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और सेवा की अच्छी यादें लेकर लौटे।आज भोरमदेव में उमड़ रही आस्था हमें भविष्य की दिशा दिखा रही है। यह समय किसी कमी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि मिलकर यह तय करने का है कि भोरमदेव को उसकी बढ़ती ख्याति के अनुरूप कैसे विकसित किया जाए।

यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर दीर्घकालीन योजना बनाएं तो भोरमदेव की कांवड़ यात्रा आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की एक ऐसी पहचान बन सकती है, जिसकी चर्चा प्रदेश से बाहर भी हो। आस्था भगवान भोलेनाथ की है, लेकिन उस आस्था को सम्मानजनक सुविधा देना हमारी जिम्मेदारी है। हर-हर महादेव।

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