जांजगीर-चांपा : करीब दो महीने से पुलिस के लिए पहेली बने अमित भंडारी हत्याकांड का आखिरकार खुलासा हो गया है। एसपी द्वारा गठित एसआईटी ने तकनीकी साक्ष्यों, सीडीआर, सीसीटीवी, टावर डंप और अन्य जांच के साथ ट्रैकर डॉग की मदद से मामले की कड़ियां जोड़ने का दावा किया है।
पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों—बजरंग सिंह, संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की वजह प्रेम प्रसंग सामने आया है।
शादी के बाद भी जारी था प्रेम प्रसंग
पुलिस जांच के अनुसार, अमित भंडारी और संतोषी सिंह के बीच शादी से पहले से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही। बताया गया कि अमित जब भी गांव आता था, संतोषी भी अपने पति से विवाद के बाद गांव आ जाती थी। दोनों के बीच रात में फोन पर बातचीत होने की बात भी जांच में सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात भी दोनों के बीच करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बातचीत हुई थी।
रात 2:30 बजे हुई मुलाकात, भाई ने देख लिया
जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा था। इसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा। घर के पीछे से आवाज सुनकर वह वहां पहुंचा तो उसने कथित तौर पर अपनी बहन के साथ अमित को देखा।
इसके बाद अमित और बजरंग के बीच विवाद हुआ और मारपीट शुरू हो गई। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान अंधेरे में अमित का सिर पीछे दीवार से टकरा गया।
बताया गया कि अमित वहां से बचकर निकलने के लिए दीवार फांदने का प्रयास कर रहा था। तभी बजरंग ने पास पड़े छोटे फावड़े से उसके सिर और छाती पर कथित तौर पर वार कर दिया। पुलिस के मुताबिक, गंभीर चोट लगने से अमित की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद बाड़ी में छिपाया शव
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद बजरंग घबरा गया और अमित के शव को घर के पीछे बाड़ी में छिपा दिया। आरोप है कि संतोषी ने भी शव छिपाने में अपने भाई की मदद की।
अगले दिन 28 जून को बजरंग का बड़ा भाई पप्पू सिंह गांव पहुंचा। बजरंग ने उसे घटना की जानकारी दी और मदद मांगी। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर पुलिस को गुमराह करने की योजना बनाई।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने परिजनों के साथ अमित को तलाशने का नाटक किया और बाद में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने मुलमुला थाना भी पहुंचे। इसके बाद रात करीब 12 बजे मौका देखकर अमित के शव को दूसरी जगह ले जाकर रख दिया गया।
CDR से लेकर नार्को टेस्ट तक हुई जांच
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने CDR, IPDR एनालिसिस, टावर डंप, GPS, CCTV फुटेज और संदिग्धों की लोकेशन समेत कई तकनीकी पहलुओं की जांच की।
इसके अलावा घटना के पीछे के संभावित मकसद और हत्या के बाद संदिग्धों के व्यवहार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों के बयान में कथित तौर पर बार-बार बदलाव सामने आने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच के साथ अन्य परीक्षणों की मदद ली।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी संतोषी सिंह का नार्को टेस्ट भी कराया गया। इसके बाद दोबारा पूछताछ में उससे महत्वपूर्ण जानकारी मिलने और कथित तौर पर अपराध स्वीकार करने का दावा किया गया है।
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल फावड़ा बरामद कर लिया है।
डॉग विमला ने दी पहली अहम लीड
एसआईटी के गठन के बाद जांच में डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई। बिलासपुर से लाई गई ट्रैकर डॉग विमला ने मामले में महत्वपूर्ण लीड दी।
पुलिस के मुताबिक, मृतक के शव को सूंघने के बाद विमला आरोपी संतोषी के घर की ओर गई और वहां जाकर बैठ गई। जांच टीम के लिए यह शुरुआती महत्वपूर्ण सुरागों में से एक रहा, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच की दिशा आगे बढ़ाई।
दो महीने तक नहीं सुलझी थी गुत्थी
मामला मुलमुला थाना क्षेत्र के ग्राम कोसा का है। पुलिस के मुताबिक, 27 से 29 जून के बीच अमित भंडारी की अज्ञात आरोपी ने हत्या कर दी थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था।
इसके बाद पुलिस ने धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि करीब दो महीने तक मामले की गुत्थी नहीं सुलझ सकी।
इसके बाद 3 सितंबर को एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने पुलिस टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद चेक पोस्ट स्थापित करने के साथ एसआईटी का गठन किया गया और मामले की जांच नए सिरे से शुरू की गई।
पुलिस के अनुसार, जांच के बाद बजरंग सिंह, संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को गिरफ्तार किया गया है। संतोषी और पप्पू को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि बजरंग को पुलिस रिमांड में लेकर आगे की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
पुलिस के दावों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले का खुलासा किया गया है। आरोपियों के खिलाफ मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।




