वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अब दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन चुका है। टेक्सास के डलास में एक रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि इस उपलब्धि में अभी वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुए नए ऊर्जा समझौते को लेकर भी बड़ा दावा करते हुए इसे संभावित रूप से अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा सौदा बताया।
ट्रंप के मुताबिक, वेनेजुएला के तेल संसाधनों के विकास से अमेरिका की ऊर्जा क्षमता और मजबूत होगी। उन्होंने वेनेजुएला के करीब 65 अरब बैरल प्रमाणित तेल भंडार का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
17 तेल क्षेत्रों को लेकर बड़ी डील
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह समझौता वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने और देश के तेल क्षेत्र के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना का हिस्सा है। समझौते के तहत नॉर्थ अमेरिकन ब्लू एनर्जी पार्टनर्स (NABEP) अपनी मूल कंपनी में 35 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी पेंटागन के ऑफिस ऑफ स्ट्रैटेजिक कैपिटल को बिना किसी लागत के देने पर सहमत हुई है।
इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग को उत्पादित तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा लागत मूल्य पर खरीदने का अधिकार दिया जाएगा।
व्हाइट हाउस का दावा है कि NABEP ने वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों के लिए 100 साल की रियायतें हासिल की हैं। हालांकि, इस अवधि को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर सामने आया है। वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले इस समझौते को 25 साल का सौदा बता चुकी थीं।
25 साल में 200 अरब डॉलर की कमाई का दावा
समझौते की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अमेरिकी प्रशासन ने बड़ा अनुमान पेश किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस ऊर्जा समझौते से शुरुआती 25 वर्षों में रॉयल्टी और टैक्स के रूप में करीब 200 अरब डॉलर की आय हो सकती है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस संभावित राजस्व का इस्तेमाल वेनेजुएला के पुनर्निर्माण, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी परियोजनाओं में किया जा सकता है।
वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका की नजर
ट्रंप प्रशासन इस समझौते को अमेरिका की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों को दोबारा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर पेश कर रहा है। हालांकि, तेल क्षेत्रों की रियायत की अवधि को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों ने समझौते की वास्तविक शर्तों को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बन चुका है और वेनेजुएला के संसाधनों का विकास इस स्थिति को और मजबूत कर सकता है।




