120 करोड़ की खैर लकड़ी तस्करी का खुलासा! ओडिशा से हिमाचल तक फैला नेटवर्क, 8 शेल कंपनियां और 10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट

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महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अवैध तस्करी के मामले में पुलिस ने बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के कथित सिंडिकेट ने पिछले करीब दो वर्षों में ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की तस्करी की। अवैध कारोबार को कागजों पर वैध दिखाने के लिए फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाते थे और जांच में आठ शेल कंपनियों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

इस मामले में पुलिस ने फर्जी कंपनियों का संचालन करने और कथित तस्करी नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश के साथ पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

23,350 किलो खैर लकड़ी के अवैध परिवहन से जुड़ा मामला

मामला कुल 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन से जुड़ा है। वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन के आधार पर खैर लकड़ी के परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई NTPS NOC में कथित कूटरचना करने और उसे वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग किए जाने के आरोप में पिथौरा थाने में अपराध दर्ज किया गया था।

पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 172/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5), 111 एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 के साथ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42(1), सहपठित धारा 41(2)(ख)(घ) एवं धारा 52(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।

मुख्य आरोपी के ठिकाने से 81 लाख रुपये जब्त

जांच के दौरान पुलिस ने मामले की वित्तीय और तकनीकी कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। इसी क्रम में 7 सितंबर 2026 को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने पर तलाशी कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान वहां से 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए।

पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और जांच में सामने आई जानकारियों से यह मामला केवल खैर लकड़ी के अवैध परिवहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित अंतरराज्यीय नेटवर्क के संचालित होने के संकेत मिले।

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ओडिशा से हिमाचल तक फैला था कथित नेटवर्क

महासमुंद पुलिस की तकनीकी जांच के अनुसार, मनीष अग्रवाल और उसके कथित सिंडिकेट ने पिछले दो वर्षों में ओडिशा से लेकर हिमाचल प्रदेश तक खैर लकड़ी की कथित तस्करी का नेटवर्क संचालित किया। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी के अवैध कारोबार का पता चला है।

इस कथित अवैध कारोबार को दस्तावेजों में वैध दिखाने के लिए फेक इनवॉयसिंग का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में ऐसे कारोबार के लिए आठ शेल कंपनियों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट से रकम की लेयरिंग

पुलिस की जांच में कथित वित्तीय नेटवर्क की एक और अहम कड़ी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, अवैध कारोबार से प्राप्त रकम के लेनदेन, भुगतान और उसकी लेयरिंग के लिए 10 से अधिक म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

अब पुलिस इन बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही कथित अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों, रकम के स्रोत और उससे जुड़े अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने ओडिशा में कथित फर्जी कंपनियों का संचालन करने और तस्करी नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी 14 सितंबर 2026 को हुई।

गिरफ्तार आरोपियों में—

1. पारितोष मिश्रा (47 वर्ष)
पिता- सुरेंद्र मिश्रा। पुलिस के अनुसार पारितोष मिश्रा पीयूष इंटरप्राइजेज का संचालक है। उसका वर्तमान पता रफाजाल, सालेभाटा, बोलांगीर, जिला बोलांगीर, ओडिशा बताया गया है।

2. अखिलेश सिंघल (52 वर्ष)
पिता- स्व. चंद्रप्रकाश सिंघल। पुलिस के अनुसार अखिलेश सिंघल सिंघल इंटरप्राइजेज, संबलपुर का संचालक है। वह संबलपुर, ओडिशा का निवासी बताया गया है।

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

अन्य आरोपियों की तलाश, वित्तीय ट्रेल पर भी नजर

महासमुंद पुलिस के अनुसार मामले में अभी अन्य संदिग्धों और सह-आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस उनकी तलाश के साथ-साथ पूरे वित्तीय ट्रेल को खंगाल रही है और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

पुलिस, वन विभाग और संबंधित वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से कथित तौर पर अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर कुर्की और राजसात की कार्रवाई भी शुरू की गई है।

महासमुंद पुलिस का कहना है कि जिले में वनोपज के अवैध परिवहन, धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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