लोरमी में न्यायिक व्यवस्था बदहाल! रीडर की कमी से कामकाज बंद, अधिवक्ताओं ने रखीं तीन बड़ी मांगें

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लोरमी : मुंगेली जिले के लोरमी तहसील कार्यालय में पिछले करीब डेढ़ महीने से न्यायिक कामकाज प्रभावित है। तहसील न्यायालय में पदस्थ शिक्षकों और लिपिकों को उनके मूल विभागों में वापस भेजे जाने के बाद रीडर की कमी हो गई है। इसके चलते नए मामलों की सुनवाई के साथ ही लंबित प्रकरणों में अगली पेशी की तारीख तय करने में भी परेशानी हो रही है।

न्यायिक कामकाज प्रभावित होने से अधिवक्ताओं और दूर-दराज से आने वाले पक्षकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर अधिवक्ता संघ लोरमी ने बुधवार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।

अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संजय त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और तीन प्रमुख समस्याओं को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

रीडर नहीं होने से डेढ़ महीने से प्रभावित है कोर्ट का काम

अधिवक्ता संघ के मुताबिक तहसील न्यायालय लोरमी में पहले शिक्षकों और लिपिकों को संलग्न कर न्यायिक कार्य में सहयोग लिया जा रहा था। बाद में इन्हें उनके मूल विभागों यानी स्कूलों और अन्य विभागों में वापस भेज दिया गया। इसके बाद से न्यायालय में नियमित रीडर की व्यवस्था नहीं हो सकी है।

संघ का कहना है कि करीब डेढ़ महीने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित है। दूर-दराज के गांवों से पक्षकार अपने मामलों की सुनवाई की उम्मीद में तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें बिना काम के वापस लौटना पड़ रहा है।

अधिवक्ताओं ने मांग की है कि तहसील न्यायालय में तत्काल नियमित रीडर की व्यवस्था की जाए, ताकि न्यायिक प्रकरणों की सुनवाई और उनका निराकरण सुचारु रूप से शुरू हो सके।

2018 से लंबित है लोरमी में उप-कोषालय की मांग

अधिवक्ता संघ ने लोरमी में सब-ट्रेजरी यानी उप-कोषालय खोले जाने की मांग भी उठाई है। संघ के अनुसार यह मांग वर्ष 2018 से लंबित है। लोरमी में 1982 में तहसील कोर्ट और 1984 में एसडीएम कोर्ट की स्थापना हुई थी। इसके बाद व्यवहार न्यायालय भी शुरू हुआ, लेकिन अब तक उप-कोषालय की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है।

इसके कारण कोर्ट फीस, स्टाम्प और टिकट जैसी आवश्यक चीजों के लिए लोगों को आज भी जिला मुख्यालय मुंगेली पर निर्भर रहना पड़ता है। अधिवक्ता संघ के मुताबिक वर्ष 2018 और 2019 में मुख्यमंत्री सचिवालय तथा कलेक्टर कार्यालय से पत्राचार भी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उप-कोषालय की स्थापना नहीं हो सकी।

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50 से ज्यादा वकील टिन-टपरी में बैठने को मजबूर

ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में सुविधाजनक भवन की कमी का मुद्दा भी उठाया। संघ के अनुसार लोरमी तहसील परिसर में रोजाना करीब 300 से 500 पक्षकार और नागरिक पहुंचते हैं। इसके बावजूद अधिवक्ताओं के बैठने और काम करने के लिए स्थायी भवन उपलब्ध नहीं है।

करीब 50 से अधिक महिला और पुरुष अधिवक्ता टिन-टपरी या खुले आसमान के नीचे बैठकर काम करने को मजबूर हैं। परिसर में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की बात भी अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में कही है।

संघ ने तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और आम नागरिकों की सुविधा के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए राशि तत्काल स्वीकृत करने की मांग की है।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता संघ लोरमी के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी, सुरेश सिंह क्षत्रिय, किशन कुमार देवांगन, भुवनेश्वर प्रसाद कश्यप, जितेंद्र सिंह ठाकुर, महेंद्र सिंह, अजय तिवारी, रामेश्वर कुलमित्र सहित अन्य अधिवक्तागण मौजूद रहे।

अधिवक्ता संघ ने प्रशासन से तीनों मांगों पर जल्द कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि तहसील न्यायालय में रीडर की व्यवस्था, उप-कोषालय की स्थापना और सामुदायिक भवन की मांग पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।

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