रायपुर : छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के सामने आमतौर पर सामाजिक बहिष्कार, प्रताड़ना और अधिकारों से जुड़े मामले पहुंचते हैं. लेकिन एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसका संदर्भ त्रेता युग से जुड़ा है. आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि दशहरा पर रावण के पुतला दहन को मानवाधिकार के नजरिए से देखने का सवाल उठाया गया.
मामले में सवाल किया गया कि हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है, तो क्या इसे मानवाधिकार के संदर्भ में देखा जा सकता है. साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि अगर रावण को लेकर ऐसा सवाल है, तो द्वापर युग के दुर्योधन के संदर्भ में ऐसा क्यों नहीं है? यानी आयोग के सामने एक ओर वर्तमान समय के सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मामले हैं. तो दूसरी ओर पौराणिक पात्रों और आधुनिक मानवाधिकार की अवधारणा को जोड़कर देखा गया एक बेहद अलग सवाल भी सामने आया है.
कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि आयोग के सामने एक आवेदनकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या रावण का पुतला जलाना उसके मानव अधिकारों का हनन नहीं हैं जबकि दुर्योधन तो उससे भी बड़ा पापी था तो उसका पुतला हर साल क्यों नहीं जलाया जाता? अगर रावण को बुराई के प्रतीक के तौर पर पुतला बनाकर जलाया जाता है, तो महाभारत के पात्र दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता? शिकायतकर्ता को समझाया गया कि रावण मानव नहीं था, इसलिए यह मामला मानव अधिकार आयोग के दायरे में नहीं आता.
आयोग में आते हैं करीब 4 हजार फर्जी मामले
आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक के मुताबिक, आयोग के गठन के बाद 26 वर्षों में लगभग 74 हजार मामले सामने आए हैं. इनमें करीब 900 मामले अभी पेंडिंग हैं. सामाजिक बहिष्कार से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी करीब 40 से 45 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि आयोग के सामने कई फर्जी मामले भी आते हैं, जिनकी संख्या 3 से 4 हजार है.
मानवाधिकार संरक्षण आयोग के सामने पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले पहुंचे हैं, जिनमें सामाजिक स्तर पर किसी व्यक्ति या परिवार को समाज से अलग करने, बहिष्कृत करने या सामाजिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें शामिल हैं. सामाजिक बहिष्कार के मामलों में कई बार व्यक्ति को समाज के कार्यक्रमों से अलग करने, उसके साथ बातचीत बंद करने, सामाजिक गतिविधियों में शामिल नहीं होने देने या परिवार पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं.
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करीब 1800 सफाई कर्मचारियों की समस्याएं आई सामने
राजधानी रायपुर में करीब 6 हजार सफाई कर्मियों में से लगभग 1,800 की समस्याएं आयोग के सामने आई हैं. इन मामलों में शिकायत मिलने के बाद संबंधित निकायों को नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद कई समस्याओं का निराकरण किया गया.
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से आयोग ने आरटीओ और ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की गई है. इसमें ड्राइवरों को सम्मानित करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के सुझाव दिए गए हैं. प्रदेश में 10 से अधिक ट्रक रखने वाले करीब 3 हजार ट्रक मालिक हैं, जिनसे जुड़े लगभग 30 हजार ट्रक ड्राइवरों का ग्रुप इंश्योरेंस कराने के लिए आयोग ने पत्र भी लिखा है.
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पहले 3 हजार से अधिक कुष्ठ रोगियों को चिन्हांकित किया गया था. दोबारा जांच के दौरान करीब 1,500 नए मामले सामने आए हैं. आयोग ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से चर्चा की है.
सरेंडर नक्सलियों से बातचीत
मानव अधिकार आयोग की टीम ने विभिन्न जिलों का दौरा कर स्कूल, अस्पताल, जेल और थानों का निरीक्षण किया. बीजापुर जिले के दौरे के दौरान सरेंडर नक्सलियों से भी चर्चा की गई. करीब 200 सरेंडर नक्सलियों से बातचीत में 9 ऐसे लोग सामने आए, जो बचपन में अनाथ हो गए थे. आयोग ने संबंधित कलेक्टरों से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें अनाथालय में रखकर देखभाल और पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि उनके अपराध या गलत रास्ते पर जाने की आशंका को कम किया जा सके.




