बॉलीवुड अभिनेता अनूपम खेर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना, प्रधानमंत्री से सवाल पूछना और उनके फैसलों से असहमति जताना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अभद्र भाषा और हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता ने प्रदर्शनकारियों से सबूत पेश करने की अपील की। अमेरिका और कनाडा के दौरे पर अपने नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ का मंचन कर रहे अनूपम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आलोचना के डर से वह चुप नहीं रहना चाहते।

‘सरकार का समर्थन करने वालों की आवाज भी सुनी जाए’
अनूपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने वालों के साथ-साथ सरकार का समर्थन करने वाले लोगों के विचारों का भी सम्मान होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि कुछ लोग किसी प्रदर्शन के पक्ष में खुलकर अपनी बात रख सकते हैं तो अलग राय रखने वालों को भी ऐसा करने का अधिकार है। अभिनेता ने कहा कि दूसरों के बीच लोकप्रिय बने रहने से ज्यादा जरूरी अपनी अंतरात्मा के प्रति ईमानदार होना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना करने या उनके फैसलों पर सवाल उठाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन असहमति जताने के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
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पीएम मोदी और उनकी मां पर टिप्पणी से नाराज
अनूपम ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिसकर्मियों, विशेषकर महिला पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी सवाल उठाए। अभिनेता ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना सही नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री की साधारण पृष्ठभूमि को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले ‘चायवाला’ जैसे संबोधनों पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति का साधारण परिवार से होना या पहले चाय बेचने का काम करना अपमान की बात नहीं है। अपने जीवन का उदाहरण देते हुए अनूपम ने कहा कि उन्हें वन विभाग में क्लर्क रहे अपने पिता का बेटा होने पर गर्व है। उन्होंने अपनी सफलता में पिता के आशीर्वाद को महत्वपूर्ण बताया।
‘वोट चोरी के आरोप हैं तो सबूत पेश करें’
चुनाव में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अनूपम ने कहा कि शिकायत करने वालों को प्रमाण सामने रखने चाहिए। उन्होंने कानूनी और संवैधानिक रास्तों के जरिए जवाब मांगने तथा निष्पक्ष जांच की मांग करने की बात कही। अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अपना भरोसा जताते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के लिए किए गए कामों को देखकर उनका विश्वास कायम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पर भरोसा रखने वाले लाखों नागरिकों की भावनाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए। अनूपम के मुताबिक यदि किसी को चुनाव में अनियमितता का संदेह है, तो उसे सबूतों के आधार पर सवाल उठाने चाहिए। केवल आरोप लगा देने से कोई दावा साबित नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को बदलने की इच्छा रखने वालों को चुनाव के जरिए जनता का समर्थन हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।
‘भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता’
अनूपम खेर ने माना कि अपनी राजनीतिक राय सामने रखने के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें ‘अंधभक्त’ या ‘दलाल’ कह सकते हैं, लेकिन वह ऐसी प्रतिक्रियाओं के डर से अपनी बात कहना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके सहकर्मियों का राजनीतिक विचारों में उनसे सहमत होना जरूरी नहीं है। अगर कुछ कलाकार किसी प्रदर्शन के समर्थन में खुलकर सामने आ सकते हैं तो अलग राय रखने वालों को भी अपनी बात रखने का अधिकार है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अभिनेता ने बताया कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम तलाशने के दौरान उन्हें कई बार रेलवे प्लेटफॉर्म पर रात गुजारनी पड़ी थी। उस समय उनके दादा ने उनसे कहा था, ‘बेटा, याद रखना, भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता।’ अनूपम ने इस सीख का जिक्र करते हुए कहा कि वह आलोचना के डर से अपने विचार नहीं छिपाएंगे। उनका संदेश साफ था कि लोकतंत्र में असहमति जरूरी है, लेकिन बहस तर्क और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि गाली-गलौज के जरिए।




