Dussehra 2026: रावण दहन के बाद राख उठाने की क्यों मचती है होड़? जानिए घर लाने के पीछे की मान्यताएं

Spread the love

दशहरे पर रावण दहन देखने के बाद आपने कई लोगों को पुतले की बची हुई राख इकट्ठा करते हुए देखा होगा। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर रावण दहन के बाद राख उठाने की क्यों मचती है होड़? इस राख को घर ले जाने के पीछे क्या वजह है और लोग इसे इतना महत्व क्यों देते हैं? दरअसल, धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में रावण दहन की राख को कुछ विशेष उपायों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसे घर लाने से सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है। चलिए जानते हैं रावण दहन के बाद पुतले की राख को घर लाने के पीछे रहस्य क्या है।

दशहरे पर रावण दहन की परंपरा

विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, दशहरा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। रावण दहन के बाद बची राख को घर लाने की सदियों पुरानी परंपरा है, जो कई जगहों और परिवारों में आज भी निभाई जाती है।

ये भी पढ़े :Dussehra 2026: दशहरे पर क्यों की जाती है शस्त्र पूजा? जानिए महाभारत से जुड़ी मान्यता और रावण दहन का मुहूर्त

  1. नकारात्मकता दूर होने की मान्यता: रावण दहन की राख को घर लाना नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाव की कामना से जुड़ा है। माना जाता है कि इस राख से जुड़े उपाय करने पर परिवार में सकारात्मकता बनी रहती है।
  2. नजर उतरने का उपाय: अगर परिवार में किसी को बार-बार बुरी नजर लगती हो, तो रावण दहन की राख को उस व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमाने की परंपरा बताई जाती है। ऐसा करने को नजर दोष से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।
  3. सुख-शांति के लिए: कुछ लोग घर में कलह-क्लेश या वास्तु दोष से जुड़ी परेशानियों के निवारण की कामना से भी राख का इस्तेमाल करते हैं। एक मान्यता के अनुसार, राख को लाल या पीले कपड़े में बांधकर मुख्य द्वार पर रखा जाता है, ताकि घर में सुख-शांति बनी रहे।
  4. तिजोरी में रखने की परंपरा: रावण दहन की राख को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की मान्यता भी प्रचलित है। ऐसा करने के पीछे घर में बरकत और आर्थिक समृद्धि की कामना जुड़ी हुई है। कुछ लोग इसे मां लक्ष्मी की कृपा पाने की आस्था से जोड़ते हैं।

आस्था के साथ सावधानी जरूरी

रावण दहन की राख से जुड़ी परंपराएं हर क्षेत्र में अलग रूपों में प्रचलित हो सकती हैं। राख घर लाने से पहले स्थानीय आयोजन के नियमों का ध्यान रखें। इसमें प्लास्टिक, धातु या अन्य जले हुए पदार्थ मिले हो सकते हैं, इसलिए इसे छूने से पहले सावधानी बरतें। दशहरे का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन से बुराई, अहंकार और नकारात्मक विचारों को दूर कर अच्छाई का मार्ग अपनाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *