प्रभु श्रीराम के गुणगान अब विदेशों में भी होंगे। राम मंदिर के निर्माण और इसके महत्व को देखते हुए योगी सरकार ने ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया के प्रकाशन की तैयारी शुरू कर दी है। आईआईटी खड़गपुर ने इसके एक खंड को प्रकाशित करने की सहमति दे दी है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने बताया है कि आईआईटी की टीम ने हाल ही में कई वेबिनार आयोजित करके विदेश में लोगों से रामकथा के प्रमाणिक दस्तावेज मुहैया करने की अपील की है। वेबिनार में कई देशों के रामकथा के जानकार लोगों ने हिस्सा लिया। डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया को 200 खंडों में प्रकाशित किया जाएगा। इस योजना के लिए भारत सरकार व अयोध्या शोध संस्थान ने 30 लाख रुपये दिए हैं। वहीं इसके अभिलेखीकरण के लिए 25 लाख और प्रकाशन के लिए 85 लाख रुपये बजट का प्रावधान है।

विदेश में श्रीराम की संस्कृति को मिलेगा विस्तार

योगी सरकार विदेश में श्रीराम के स्तर में विस्तार लाना चाहती है। डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण पर 2018 में ही योजना शुरू हो गई थी। सीएम योगी ने 2018 की बैठक में इस योजना पर काम करने की सहमति दी थी। इस ग्रंथ के प्रकाशित होने के बाद राम मंदिर के दर्शन के साथ देश विदेश में भारतीय संस्कृति को प्रभु राम के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में मदद मिलेगी। उधर, प्रदेश के प्रमुख सचिव संस्कृति जितेंद्र कुमार ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर विदेशों में प्रभु श्रीराम की धरोहरों को संग्रहित व संरक्षित करने में सहयोग की मांग की है। विदेश सचिव ने रामकथा के तीन वर्गों से जुड़े 205 देशों को जोड़ने का प्रयास भी शुरू करने को कहा है।

सामाजिक जीवन शैली होगी प्रकाशित

इनसाइक्लोपीडिया में प्रभु श्रीराम व रामकथा से जुड़े चित्र, मूर्तियां, संगीत, रामलीलाएं, साहित्य, साजािक जीवन शैली आदि को प्रकाशित किया जाएगा।

देश-विदेश में रामकथा सामग्री संग्रह व इसके शोध के लिए कमिटियां व संपादक मंडलों का गठन भी किया गया है। डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि अयोध्या शोध संस्थान के अलावा संस्कृति विभाग, केंद्र सरकार व कई अन्य संस्थाएं इसके प्रकाशन के लिए वित्तीय सहयोग देंगी।

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