छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: श्री सीमेंट को रेल कनेक्टिविटी देने के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों की याचिकाएं खारिज

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बिलासपुर : हाईकोर्ट ने सीमेंट कंपनी को रेलवे कनेक्टिविटी देने के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अधिग्रहण की प्रक्रिया में ऐसी कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता साबित नहीं कर पाए, जिसके आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप किया जा सके।

मामले के अनुसार, रेल मंत्रालय ने 16 जून 2025 को अधिसूचना जारी कर हथबंध रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन से खपराडीह गांव तक रेलवे ट्रैक बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित किया था। इसका उद्देश्य गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को रेल संपर्क उपलब्ध कराना था। रवेली सहित आसपास के गांवों के किसानों ने रेलवे अधिनियम की धारा 20-डी के तहत आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका तर्क था कि प्रस्तावित अधिग्रहण वास्तविक सार्वजनिक उद्देश्य के बजाय निजी कंपनी श्री सीमेंट को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

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किसानों की दलील

किसानों ने यह भी दलील दी कि क्षेत्र में पहले से रेलवे अधोसंरचना उपलब्ध है। अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए रावन से हथबंध क्षेत्र तक रेलवे ट्रैक बनाया जा चुका है और उसके आसपास खाली जमीन भी मौजूद है। श्री सीमेंट ने निजी तौर पर जमीन खरीदकर खपराडीह से रवेली तक रेलवे ट्रैक बनाया है, जिसे मौजूदा रेल लाइन से जोड़ा जा सकता है।

सिंचित खेतों और कृषि उत्पादन पर असर की आशंका

किसानों के अनुसार, नई लाइन उनके सिंचित खेतों के बीच से गुजरने के कारण खेती और उत्पादन प्रभावित होंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि उनके प्रमुख तर्कों और वैकल्पिक व्यवस्था की संभावनाओं पर समुचित विचार किए बिना आदेश पारित किया गया। एक अन्य याचिका में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित रेल लाइन से कई गांवों के किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले पर क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और रेलवे अधिनियम की धारा 20-ई के तहत घोषणा भी जारी हो चुकी है। इस चरण में पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द करने से रेलवे के बुनियादी ढांचे पर असर पड़ेगा, जिससे अनेक गांवों और बड़ी संख्या में भू-स्वामियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

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