रायपुर 13 अक्टूबर chhattisgarh.co| “मरवाही” स्वर्गीय अजीत जोगी की अभेद्य किला जिसे जोगी के जीवित रहते न कांग्रेस भेद पाई और न,ही वरतमान समय की सबसे बड़ी राजनितिक पार्टी बीजेपी,पर जोगी के जाने के बाद अजीत मरवाही को जीतने का प्रयास बीजेपी और कांग्रेस दोनों बड़े जोरों से कर रही है और इसके लिए ये दोनों पार्टियां साम,दाम,दंड,भेद सबका प्रयोग कर रही है और जोगी की किला को भेदने के लिए जाति प्रमाण पत्र रूपी ब्रहास्त्र का प्रयोग दोनों राजनीतिक पार्टियां ने आखिर कर ही दी परिणाम स्वरूप जोगी के लाडले अमित और उनकी पत्नी ऋचा चुनावी मैदान में पस्त खाते हुए दिखाई पड़ रहे है क्योकि जोगी परिवार की जाति प्रमाण पत्र को चेक करने वाली उच्च स्तरीय कमेटी ने उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए निरस्त कर दिया|

परिणाम स्वरूप जोगी के लाडले और उनकी बहु को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है ऐसें में जोगी की विरासत अजीत के जाने बाद छुटती हुई दिखाई पड़ रही है क्योकि नामांकन में उन्होंने अपने आप को आदिवासी बताया है पर उनके जाति प्रमाण पत्र को आज ही निरस्त कर दिया गया है और उनके आदिवासी होने पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है|

ऐसे में प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट मरवाही किसके हाथ लगेगी यह आज के समय में सबसे बड़ा सवाल है कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही अमित को जाति के नाम पर लगातार घेरते हुए नजर आ रही है बात रही चुनाव जितने की तो सब अपने अपने स्तर पर तैयारियां कर रहें है कांग्रेस ने तो आज से अपने प्रत्याशी डॉ के के ध्रुव के साथ चुनाव प्रचार करना भी शुरू कर दिया है बीजेपी भी दबे पाँव रणनीति बनना रही है पर जोगी के किले को भेदने की चुनौती दोनों ही पार्टी के पास है जहाँ कांग्रेस पिछले एक दशक से मरवाही मैदान से बाहर है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी पिछले दो दशको से मरवाही का मुख नही देख पाई एक ओर जोगी की लम्बी राजनितिक विरासत है तो दूसरी ओर लम्बे-लम्बे राजनितिक दावें चाहे वो सत्तारूढ़ कांग्रेस के हो या सत्ता से बाहर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी की |

अमित के पास अपने पिता की लम्बी राजनितिक विरासत के साथ,जोगी की उस क्षेत्र में सर चढके बोलती लोकप्रियता भी है इसके अतिरिक्त उनके पास जनता की सहानभूति भी है जो जोगी के जाने के बाद प्रत्यक्ष रूप से उनके पाले में आ सकती है जरुरत है तो बस सही से उसे भुनाने की किन्तु उनका जाति प्रमाण पत्र विवाद इस रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है जो बार बार उन्हें चुनावी मैदान में चारों खाने चित कर सकता है|

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नन्द कुमार साय को इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती को सामना कर पढ़ सकता है,उन्होंने हाल ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभाली है जिसके बाद यह चुनाव सामने है इसे जीत दिलाने के लिए वो जी तोड़ मेहनत करेंगे क्योकि यह चुनाव उनकी कार्यकुशलता का माप दंड तय करेगा और साथ ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी |

प्रदेश के मुखिया भूपेश और पीसीसी चीफ इसके लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे क्योकि सवाल यहाँ प्रदेश सरकार की प्रतिस्ठा और उनकी सफलता का है सीएम बघेल अक्सर बड़े बड़े मंचों से अपने सरकार के कार्यों का महिमा मंडन और उनकी पब्लिसिटी करती हैं चुनाव एक तरह से उनके सरकार की परीक्षा है अगर उन्होंने अपनी सरकार बनने के बाद किसान हित,आदिवासी हित और प्रदेश हित में बेहतर काम किया है तो उनके कार्यशैली से प्रभावित होकर निश्चित तौर पर मरवाही की जनता उन्हें चुनेगी|         

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