रायपुर 22 अक्टूबर chhattisgarh.co। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने बीजेपी के उपर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि 2019 के घोषणा पत्र में कांग्रेस ने कृषि उपज मंडियों का विकेंद्रीकरण कर कस्बों और ग्राम पंचायतों में किसान बाजार स्थापित कर समर्थन मूल्य में खरीदी करने का वादा किया था और कांग्रेस के 2019 के घोषणा पत्र में कृषि संबंधी कुल 22 बिंदुओं पर फोकस किया गया था जिसमे पूरी तरह से किसानों की बेहतरी को ध्यान में रखकर कांग्रेस के द्वारा संकल्प जारी किया गया था।

कांग्रेस के किसान बाजार की स्थापना का वादा और भाजपा के द्वारा चंद पूंजीपतियों के मुनाफे पर केंद्रित निजी मंडियों में जमीन आसमान का फर्क है।मूल अंतर नीति और नियत का है। मोदी सरकार पूरी तरह पूंजीवादी व्यवस्था से प्रेरित होकर काम कर रही है और नीत नये किसान, मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने आगे कहा है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत लागू स्टॉक लिमिट को खत्म करना सीधे तौर पर जमाखोरों और कालाबाजारी करने वाले कोचियों को संरक्षण देने का षड्यंत्र है। अनाज, तिलहन, दलहन, आलू, प्याज जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर करना है मोदी सरकार का किसान और उपभोक्ता विरोधी निर्णय है। कांन्ट्रैक्ट फार्मिंग देश के किसानों को अपनी ही जमीन पर बंधुआ मजदूर बनाने का षड्यंत्र है जिस पर मोदी सरकार अपने चंद पूंजीपति मित्रों के साथ मिलकर अमल करना चाहती है। गुजरात में पेप्सिको कंपनी, महाराष्ट्र और बिहार में भी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों के शोषण के अनेकों उदाहरण विद्यमान है। एक तरफ तो मोदी जी यह कहते हैं कि एमएसपी था, है और रहेगा, वही एक्ट में किसानों को एमएसपी की गारंटी नही है। यही इनका दोहरा चरित्र है। यदि इनकी नियत साफ है तो यह प्रावधान किया जाये की एमएसपी से कम पर खरीदी कानून अपराध हो। सरकारी मंडियों के सामने मंडी टैक्स की बाध्यता से निजी मंडियों को छूट देकर दुर्भावना पूर्वक पिछले रास्ते से सरकारी मंडियों को खत्म करने की साजिश की गई है, पर हकीक़त सामने आने से मोदी सरकार के पूंजीपति मित्रों की साजिश बेनकाब न हो जाए इसलिए ये किसान विरोधी कानून लाकर भी किसान हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।

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