नई दिल्ली 25 अक्टूबर chhattisgarh.co|राष्ट्रीय स्वयंसेवक के स्थापना दिवस और विजयदशमी के मौके पर रविवार को सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया, इस संबोधन के दौरान उन्होंने अनुच्छेद 370, राम मंदिर, नागरिकता क़ानून और चीन के साथ गतिरोध और कोरोना जैसे कई मुद्दों पर पर बात की.

उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक महत्वकांक्षा के लिए ‘देश विरोधी व्यवहार’ करने का आरोप लगाया.संघ की ओर से शस्त्रपूजा और विजयदशमी का यह कार्यक्रम इस बार नागपुर में डॉक्टर हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में किया गया.

मोहन भागवत ने अपने भाषण में ‘हिंदुत्व’ शब्द पर काफ़ी लंबी चर्चा की और विरोधियों पर इसे लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ”हिन्दुत्व ऐसा शब्द है, जिसके अर्थ को पूजा से जोड़कर संकुचित किया गया है. यह शब्द अपने देश की पहचान को, आध्यात्म आधारित उसकी परंपरा के सनातन सातत्य और समस्त मूल्य सम्पदा के साथ अभिव्यक्ति देने वाला शब्द है.”

हिन्दू किसी पंथ या संप्रदाय का नाम नहीं है. किसी एक प्रांत का अपना उपजाया हुआ शब्द नहीं है, किसी एक जाति की बपौती नहीं है, किसी एक भाषा का पुरस्कार करने वाला शब्द नहीं है.”

मोहन भागवत ने कहा, ”जब हम कहते हैं कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है तो इसके पीछे राजनीतिक संकल्पना नहीं है. ऐसा नहीं है कि हिंदुओं के अलावा यहां कोई नहीं रहेगा बल्कि इस शब्द में सभी शामिल हैं.”

”हिंदू शब्द की भावना की परिधि में आने व रहने के लिए किसी को अपनी पूजा, प्रान्त, भाषा आदि कोई भी विशेषता छोड़नी नहीं पड़ती. केवल अपना ही वर्चस्व स्थापित करने की इच्छा छोड़नी पड़ती है. स्वयं के मन से अलगाववादी भावना को समाप्त करना पड़ता है.”

संघ प्रमुख ने कहा, ”हमारी छोटी-छोटी पहचान भी हैं, हमारी विविधता है, कुछ पहले से थे और कुछ बाहर से आए जो यहीं शामिल हो गए. हिंदू विचार में ऐसी विविधताओं का स्वीकार और सम्मान हैं. लेकिन इस विविधता को कई लोग अलगाव कहते हैं.”

मोहन भागवत ने अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि बिल का समर्थन भी किया. उन्होंने कहा कि ऐसी नीति चाहिए कि किसान अपने माल का भंडारण, प्रसंस्करण खुद कर सके, सारे मध्यस्थों और दलालों के चंगुल से बचकर अपनी मर्जी से अपना उत्पादन बेच सके, यही स्वदेशी कृषि नीति कहलाती है.

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