बिहार में जीत के बाद जश्न मनाते बीजेपी के कार्यकर्ता (पीटीआई)

बिहार 11 नवम्बर chhattisgarh.co|कोरोना संकट के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुका है और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने एक बार फिर जीत हासिल की है. यह चुनाव कई मायनों में बेहद दिलचस्प रहा, खासकर चुनाव परिणामों को लेकर. नालंदा जिले की हिलसा विधानसभा पर हार-जीत का अंतर महज 12 वोटों का रहा. तो इसी तरह एक सीट ऐसी भी रही जहां पर पिछले चुनाव की तुलना में इस बार जीत के अंतर में महज 4 वोट का ही इजाफा हो सका.हिलसा विधानसभा सीट पर मतगणना शुरू होने के बाद से ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रत्याशी और विधायक शक्ति सिंह यादव लगातार बढ़ता बनाए हुए थे. लेकिन अंतिम दौर तक पहुंचते-पहुंचते जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रत्याशी कृष्णमुरारी शरण ने बढ़त बना ली और अंतिम चरण की मतगणना के बाद जब परिणाम घोषित किया गया तो कृष्णमुरारी शरण ने महज 12 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.

इसी तरह पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज विधानसभा सीट पर जीत के अंतर का एक दिलचस्प रिकॉर्ड बना. गोविंदगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सुनील मणि तिवारी विजयी हुए. उन्होंने लगभग एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस ब्रजेश कुमार को हरा दिया. सुनील मणि तिवारी ने यह मुकाबला 27,924 मतों के अंतर से जीता.

लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में गोविंदगंज सीट पर हार-जीत का अंतर 27,920 का था और इस अंतर के साथ लोक जनशक्ति पार्टी के राजू तिवारी ने जीत हासिल की थी. खास बात यह है कि राजू तिवारी ने तब कांग्रेस के ब्रजेश कुमार को ही 27,920 मतों के अंतर से हराया था. और इस बार सुनील मणि तिवारी ने ब्रजेश कुमार को 27,924 मतों के अंतर से हरा दिया. दोनों चुनाव में हार-जीत के अंतर को देखा जाए तो यह अंतर महज 4 वोटों का ही रहा.

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