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नई दिल्ली 21 नवम्बर । देश में बैंकिंग क्षेत्र में क्रांति आ रही है। यदि सरकार ने अनुमति दी तो कई गली मौहल्लों में भी निजी बैंकों की बहार दिखाई दे सकती है। दरअसल अभी बैंकों में सरकार, सहकारी संस्थाए और बड़े कारोबारियों का ही दबदबा है। लेकिन अब आरबीआई ने जो सिफारिश की है, वो काफी क्रांतिकारी है। रिजर्व बैंक के समिति की सिफारिश में नए कारोबारियों को अपना बैंक खोलने का मौका मिलेगा।अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले वक्त में देश के बड़े कारोबारी भी किसी निजी बैंक के प्रमोटर बन सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक के एक समिति ने कहा है कि बड़ी कंपनियों या औद्योगिक घरानों को बैंकों के प्रमोटर बनने की अनुमति दी जा सकती है। 

समिति ने बड़ी कंपनियों/औद्योगिक घरानों को बैंकों का प्रमोटर बनाए जाने की सिफारिश की है। अगर समिति की सिफारिश को आरबीआई की ओर से मंजूरी मिलती है तो देश के कारोबारी भी अपना बैंक खोल सकेंगे। इसके साथ ही समिति ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक संपत्ति वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकों में बदलने पर विचार किया जा सकता है। इसमें वे इकाइयां भी शामिल हैं जिनका कॉरपोरेट हाउस है। लेकिन इसके लिये 10 साल का परिचालन होना जरूरी शर्त होनी चाहिए। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि यूनिवर्सल बैंकिंग के लिये नये बैंक लाइसेंस को लेकर न्यूनतम प्रारंभिक पूंजी 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये की जानी चाहिए।

वहीं लघु वित्त बैंक के लिये 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये की जानी चाहिए। सूत्र बता रहे है कि प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ाने पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय विचार भी कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की समिति ने सिफारिश में ये भी कहा है कि निजी बैंकों में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत की जा सकती है। इसके अलावा आरबीआई और वित्त मंत्रालय बैंकिंग सेक्टर को मजबूती देने के लिए कई और मुद्दों पर मंथन कर रहा है। इसमें बैंक लाइसेंस के आवेदन के लिए व्यक्तिगत रूप से या इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी शामिल है। इसके अलावा प्रमोटर्स और अन्य शेयरधारकों द्वारा बैंकों में दीर्घकालीन शेयरधारिता के लिए नियमों की भी समीक्षा शामिल थी।

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