• 50 हजार से ज्यादा कीमत के गिफ्ट टैक्स के दायरे में आते हैं
  • इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 56(2)(x) के तहत करदाता को मिले गिफ्ट्स पर टैक्स की देनदारी बनती है

CHHATTISGARH.CO DATE 05/12/2020;- शादियों का सीजन शुरू हो चुका है। शादी में लोग दूल्हा और दुल्हन को कई तरह के गिफ्ट देते हैं। इसके अलावा दीवाली पर भी लोग एक दूसरे को गिफ्ट देते हैं। ऐसे में अगर आपको भी शादी या दिवाली के मौके पर गिफ्ट मिलते हैं तो आपको अलर्ट रहने की जरूरत है वरना आपको इनकम टैक्‍स विभाग से नोटिस मिल सकता है। इनकम टैक्‍स के नियमों के तहत अगर आपको एक साल में 50 हजार रुपए से अधिक कीमत का गिफ्ट मिला है तो इस पर आपको टैक्‍स देना होगा। ऐसे में आपको इनकम टैक्‍स रिटर्न भरते समय इस बात का ध्‍यान रखना होगा।

50 हजार से ज्यादा कीमत के गिफ्ट पर देना होता है टैक्स
मौजूदा नियमों के तहत अगर आपको एक साल में 50 हजार रुपए से अधिक कीमत का गिफ्ट मिलता है तो इस पर आपको टैक्‍स देना होगा। कई बार साल में कई मौकों पर आपको गिफ्ट मिलता है और हो सकता है कि इसकी कुल कीमत 50 हजार रुपए से अधिक हो। ऐसे में इनकम टैक्‍स रिटर्न भरते समय आपको इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए। आपको इनकम टैक्‍स में 50 हजार रुपए से अधिक के गिफ्ट की जानकारी देनी होगी। अगर आप यह जानकारी इनकम टैक्‍स विभाग से छिपाते हैं आपको बाद में मुश्किल हो सकती है।

कैसे लगता है गिफ्ट पर टैक्स

  • इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 56(2)(x) के तहत करदाता को मिले गिफ्ट्स पर टैक्स की देनदारी बनती है। टैक्स के दायरे में आने वाले गिफ्ट्स में ये चीजें शामिल हैं-
  • चेक या कैश में मिली 50 हजार रुपए से ज्यादा की रकम।
  • जमीन, बिल्डिंग आदि जैसी कोई भी अचल संपत्ति, जिसकी स्टांप ड्यूटी 50 हजार रुपए से ज्यादा हो।
  • 50 हजार रुपए से ज्यादा की ज्वैलरी, शेयर, पेंटिंग्स या अन्य महंगी चीजें।
  • अचल संपत्ति के अलावा 50 हजार रुपए से ज्यादा की कोई भी प्रॉपर्टी।

2 लाख रुपए से ज्यादा का नगद गिफ्ट न लें
सेक्शन 269ST के अनुसार यदि कोई पर्सन 2 लाख या अधिक की राशि नकद में प्राप्त करता है, तो उस पर्सन पर पेनल्टी लगाई जाएगी। यानि कि इस सेक्शन में पेनल्टी Cash में राशि प्राप्त करने वाले पर लगाई जाएगी न की राशि का भुगतान करने वाले पर। इसलिए अगर आप 2 लाख या अधिक की राशि गिफ्ट के रूप में ले रहे हैं, तो इसे सिर्फ बैंकिंग चैनल्स के माध्यम से लें, जैसे :- A /C Payee चेक, या A /C Payee बैंक ड्राफ्ट, या इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरेंस सिस्टम के माध्यम से बैंक में ट्रांसफर। यदि पेमेंट सेल्फ चेक के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है, तो इसे भी कैश में किया गया लेनदेन ही माना जायेगा और पेनल्टी लगाई जाएगी।

रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर नहीं लगता है टैक्स
अगर आपको अपने परिवार के सदस्यों से गिफ्ट मिलता है जिनके साथ आपको ब्लड रिलेशन है तो इस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता है। आप अपने परिवार के सदस्यों से कितनी भी कीमत का गिफ्ट ले सकते हैं या दे सकते हैं। यह टैक्सेबल नहीं है। छूट के इस दायरे में आने वाले गिफ्ट इस तरह हैं-

  • पति या पत्नी से मिला गिफ्ट।
  • भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • पति या पत्नी के भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • माता-पिता के भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • विरासत या वसीयत में मिला ​गिफ्ट या प्रॉपर्टी।
  • पति या पत्नी के किसी निकटतम पूर्वज या वंशज से मिला गिफ्ट।
  • हिंदु अनडिवाइडेड फैमिली के मामले में किसी भी मेंबर से मिला गिफ्ट।
  • लोकल अथॉरिटी जैसे पंचायत, म्यूनिसिपैलिटी, म्यूनिसपल कमेटी और डिस्ट्रिक्ट बोर्ड, कैंटोनमेंट बोर्ड से मिला गिफ्ट।
  • सेक्शन 10 (23C) में उल्लिखित किसी फंड/फाउंडेशन/यूनिवर्सिटी या अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल या अन्य मेडिकल इंस्टीट्यूशन, ट्रस्ट या इंस्टीट्यूशन से मिला गिफ्ट।
  • सेक्शन 12A या 12AA के तहत रजिस्टर किसी चैरिटेबल या धार्मिक ट्रस्ट से मिला गिफ्ट।

एम्प्लॉयर से मिले तोहफे पर भी लगता टैक्स
अगर आपके एम्प्लॉयर से एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपए मूल्य तक का मिला उपहार टैक्स फ्री होगा, लेकिन तोहफे की वैल्यू 5,000 रुपए से ज्यादा हुई तो अतिरिक्त रकम को आपकी सैलरी से हुई आमदनी मानी जाएगी और उस पर इनकम टैक्स देना होगा।

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