रायगढ़ : जिले में अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के त्वरित निराकरण को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के राजपत्रित अधिकारियों, थाना और चौकी प्रभारियों की क्राइम मीटिंग ली। बैठक में लंबित गंभीर अपराधों, फरार आरोपियों, अवैध गतिविधियों, अवैध प्रवासियों की जांच और डिजिटल पुलिसिंग समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई।
गंभीर अपराधों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश
एएसपी अनिल सोनी ने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों से लंबित गंभीर अपराधों की एक-एक कर समीक्षा की। उन्होंने अपराध लंबित रहने के कारणों की जानकारी लेते हुए शीघ्र निराकरण के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अपराध दर्ज होने के बाद निर्धारित समयसीमा का पालन जरूरी है। सामान्य मामलों का 60 दिनों के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने और इसकी आवश्यक प्रविष्टि CCTNS में अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए। गंभीर मामलों में भी विवेचना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने को कहा गया।
अवैध प्रवासियों की जांच पर विशेष फोकस
बैठक में अवैध प्रवासियों की जांच को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए। एएसपी ने कहा कि बाहरी व्यक्तियों की जानकारी का सत्यापन अपराध नियंत्रण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इसके लिए होटल संचालकों और मकान मालिकों को अपने यहां ठहरने वाले लोगों और किरायेदारों की जानकारी ‘समाधान ऐप’ के माध्यम से दर्ज कराने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
जुआ-सट्टा और नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश
एएसपी ने स्पष्ट किया कि जिले में जुआ-सट्टा और नशे का अवैध कारोबार किसी भी स्थिति में संगठित रूप से संचालित नहीं होना चाहिए। सूचना मिलते ही प्रभावी कार्रवाई करने और ग्रामीणों के सहयोग से अवैध शराब के खिलाफ सूचना तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और महिला एवं बच्चों से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
आदतन अपराधियों पर लगेगा शिकंजा
संदिग्ध और आदतन अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। एएसपी ने आदतन बदमाशों के खिलाफ धारा 129 BNSS (पूर्व धारा 110 CrPC) के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अपराध की पुनरावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
2025 और 2026 के अपराध आंकड़ों की हुई तुलना
क्राइम मीटिंग में वर्ष 2025 और 2026 के पहले सात महीनों में दर्ज अपराधों, पुलिस कार्रवाई और मामलों के निराकरण की तुलनात्मक समीक्षा की गई। जिन थानों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और लघु अधिनियम के तहत अपेक्षाकृत कम कार्रवाई पाई गई, वहां कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
लंबित मर्ग और शिकायतों की भी समीक्षा कर समयसीमा में निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया।
डिजिटल पुलिसिंग और नए कानूनों पर जोर
एएसपी ने नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ पुलिसिंग में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया। सभी विवेचकों को प्रशिक्षण से जुड़कर नई कानूनी प्रक्रिया और डिजिटल पुलिसिंग की बारीकियां सीखने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा CCTNS, शिकायत पोर्टल और साइबर संबंधी पोर्टल पर आवश्यक एंट्री समय पर पूरी करने, ई-समंस की तामिली, ऑनलाइन न्यायालयीन पेशी और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा गया।
ज्यादा लंबित मामलों वाले थानों पर विशेष निगरानी
जिन थानों में लंबित मामलों की संख्या अधिक पाई गई, वहां एसडीओपी और थाना प्रभारियों को अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों के निराकरण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
एएसपी ने स्पष्ट किया कि लंबित अपराधों की विवेचना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक विवेचक को अपने मामलों की नियमित समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित करनी होगी।
प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के काम की भी समीक्षा
क्राइम मीटिंग के बाद जिले में पदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के कार्यों की भी समीक्षा की गई। उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी विवेचकों से अपराध विवेचना की बारीकियां सीखने तथा नए कानूनों और डिजिटल पुलिसिंग की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एएसपी ट्रैफिक पुष्पेंद्र बघेल, सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव, रक्षित निरीक्षक अमित सिंह समेत जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारी मौजूद रहे।

