गुजरात में 6 महानगर पालिका चुनावों में काउंटिंग जारी है। अहमदाबाद समेत 6 महानगर पालिका (मनपा) की कुल 576 सीटों पर 21 फरवरी को वोट डाले गए थे। 6 में से 5 मनपा यानी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, जामनगर और भावनगर में भाजपा को बहुमत मिल गया गया है। भाजपा 339 और कांग्रेस 45 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। सूरत में आम आदमी पार्टी (AAP) 18 सीटों पर आगे होकर दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है। उसने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

 

अहमदाबाद में ओवैसी की पार्टी के 3 उम्मीदवार पीछे हुए

  • असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी पहली बार अहमदाबाद के 6 वार्डों में प्रत्याशी उतारे थे। शुरुआती रुझानों में 3 सीटों पर AIMIM के उम्मीदवार आगे थे। अब पीछे हो गए हैं।
  • गुजरात में 6 महानगरों अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, भावनगर और राजकोट में वोटिंग हुई थी। अहमदाबाद की नारायणपुरा सीट पर महिला उम्मीदवार बिंद्रा सूरती के सामने कोई उम्मीदवार न होने की वजह से भाजपा यह सीट चुनाव पूरे होने से पहले ही जीत चुकी है।
  • भाजपा और कांग्रेस ने इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ज्यादा अहमियत दी है। गृहमंत्री अमित शाह भी अपने पूरे परिवार के साथ वोट डालने के लिए पहुंचे थे। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के अलावा केंद्रीय मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी थी।

सूरत में कांग्रेस के तीसरे नंबर पर जाने की वजह
सूरत में 2015 के चुनाव की तुलना में इस बार कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। इसकी दो वजहें हैं। पहली- पाटीदार आरक्षण समिति (पास) ने कांग्रेस का विरोध किया था। दूसरी- आम आदमी पार्टी ने पाटीदार उम्मीदवारों को टिकट दिए और उसी क्षेत्र को केंद्र में रखकर प्रचार किया। यही वजह रही कि आम आदमी पार्टी यहां कांग्रेस से भी आगे निकल गई। भाजपा ने भी पाटीदार क्षेत्रों में रोड शो किए थे, लेकिन इसके बावजूद उसका सभी 120 सीटें जीतने का टारगेट पूरा होना मुमकिन नहीं लग रहा। पिछली सूरत में भाजपा को 120 में से 80 और कांग्रेस को 36 सीटें मिली थीं।

6 नगर निगम में कुल 2,276 उम्मीदवार, सबसे ज्यादा भाजपा के

  • भाजपा- 577
  • कांग्रेस- 566
  • आप- 470
  • राकांपा- 91
  • अन्य पार्टियां- 353
  • निर्दलीय- 228

पिछले साल दिसंबर में ही पूरा हो गया था कार्यकाल
गांधीनगर और जूनागढ़ को छोड़कर इन छह नगर निगमों का कार्यकाल पिछले साल दिसंबर में ही पूरा हो गया था, लेकिन कोरोना की वजह से चुनाव नहीं हो पाए थे। इस वजह से निगम सरकार को भंग कर दिया गया था। म्युनिसिपल कमिश्नर ही निगम को चला रहे थे।

जिला-तालुका पंचायतों में भी होने हैं चुनाव
अगले रविवार यानी 28 फरवरी को 31 जिला, 231 तालुका पंचायत और 81 नगर पालिकाओं में चुनाव होंगे।

 

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