अडानी-हिंडनबर्ग केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, फिर दे डाली ये नसीहत

अडानी-हिंडनबर्ग केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, फिर दे डाली ये नसीहत

अडानी-हिंडनबर्ग केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है. चीफ जस्टिस की अगुवाई में पांच जजों के सामने चली इस सुनवाई में सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सेबी का पक्ष रखा. वहीं दूसरी ओर प्रशांत भूषण पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने लेकर आए. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद कई नसीहत भी दी. उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने वाले मार्केट रेगुलेटर सेबी पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है.

उसने कहा कि मार्केट रेगुलेटर की जांच के बारे में भरोसा नहीं करने के लायक कोई भी फैक्ट कोर्ट के सामने नहीं है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कि वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह से फैक्ट पर आधारित नहीं मानकर चल रहा है. पीठ ने कहा कि उसके सामने कोई फैक्ट ना होने पर अपने लेवल पर स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम यानी एसआईटी का गठन करना सही नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अडानी हिंडनबर्ग मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुन लिया है और अपने आदेश को सुरक्षित भी रख लिया है.

यह मामला जनवरी में आई हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर शेयरों के भाव में हेराफेरी करने और फ्रॉड के आरोपों से संबंधित है. हालांकि ग्रुप ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया लेकिन उसकी कंपनियों के शेयरों के भाव में भारी गिरावट आ गई थी. कोर्ट ने कुछ मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सेबी को अडानी हिंडनबर्ग मामले की जांच के लिए कहे जाने पर आपत्ति जताई. कोर्ट ने कहा कि वह किसी भी रेगुलेटरी बॉडी को मीडिया में प्रकाशित किसी बात को अटल सत्य मानने को नहीं कह सकता है.

सेबी की भूमिका पर शक

पीठ ने कहा साफ किया कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट कही गई बातों को सही मानने की जरुरत नहीं है. इसी वजह से कोर्ट सेबी को जांच करने का निर्देश दिया. पीठ ने एक याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण की तरफ से सेबी की भूमिका पर संदेह जताने पर कहा कि हमारे लिए किसी रिपोर्ट में दर्ज ऐसी चीज को स्वीकार करना, जो हमारे सामने नहीं है और जिसकी सत्यता का परीक्षण करने का हमारे पास कोई साधन भी नहीं है, वास्तव में अनुचित होगा. भूषण ने कहा था कि सेबी के पास अडानी ग्रुप की गड़बड़ियों के बारे में वर्ष 2014 से ही तमाम जानकारी उपलब्ध थी. पीठ ने कहा कि सेबी अपनी जांच पूरी कर ली है. उनका कहना है कि अब यह उनके अर्द्ध-न्यायिक क्षेत्राधिकार में है. कोई कारण बताओ नोटिस जारी करने के पहले क्या उन्हें जांच का खुलासा कर देना चाहिए.

क्यों किया जाए सेबी पर शक?

इस पर भूषण ने कहा कि शीर्ष अदालत को इस पर भी गौर करना होगा कि क्या सेबी की जांच विश्वसनीय है और क्या इसकी जांच का जिम्मा किसी स्वतंत्र संगठन या एसआईटी को सौंपा जाना चाहिए. इस पर पीठ ने सवाल उठाते हुए कहा कि सेबी के काम पर संदेह करने वाला तथ्य हमारे समक्ष कहां है? इसके साथ ही पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति के दो सदस्यों पर ‘हितों के टकराव’ का आरोप लगाने पर भी कड़ी टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि आपको काफी सतर्क होने की जरूरत है. आरोप लगाना बहुत आसान है लेकिन हमें निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांत का भी ध्यान रखना है.’

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी पर सवाल उठाने पर कहा

पीठ ने सेबी की जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने पर कहा कि हमें यह ध्यान रखना होगा कि सेबी एक वैधानिक निकाय है जिसे शेयर बाजार नियमों के उल्लंघन की जांच का अधिकार है. आज देश की सुप्रीम कोर्ट के लिए किसी तथ्य के बगैर क्या यह कहना उचित है कि हम आपको जांच नहीं करने देंगे और अपनी तरफ से एक एसआईटी बनाएंगे? ऐसा बहुत जांच-परख के साथ करना होगा.’ सीनियर लॉयर भूषण ने अडानी ग्रुप के खिलाफ प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट का ध्यान नहीं रखे जाने की बात कही. इस पर पीठ ने कहा कि सेबी मीडिया में प्रकाशित सामग्री को अटल सत्य मानकर नहीं चल सकता है क्योंकि वह साक्ष्यों की बाध्यता से संचालित है.

24 में 22 की जांच पूरी

सुनवाई के दौरान सेबी का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत के भीतर की चीजों और नीतियों को प्रभावित करने के लिए देश के बाहर खबरें परोसने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. मेहता ने पीठ को बताया कि अडानी ग्रुप के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित 24 में से 22 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है जबकि दो मामलों में विदेशी नियामकों से जानकारी हासिल करने की जरूरत है. मेहता ने कहा कि बाकी दो मामलों के लिए हमें विदेशी नियामकों से जानकारी और कुछ अन्य सूचनाओं की जरूरत है. हम उनके साथ परामर्श कर रहे हैं. कुछ जानकारी मिली है लेकिन स्पष्ट कारणों से समय सीमा पर हमारा नियंत्रण नहीं है.









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