उच्च न्यायालय के आदेश के दस वर्ष बाद भी सीबीआई नहीं पेश कर पाई उमेश राजपूत हत्याकांड की जांच रिपोर्ट

उच्च न्यायालय के आदेश के दस वर्ष बाद भी सीबीआई नहीं पेश कर पाई उमेश राजपूत हत्याकांड की जांच रिपोर्ट

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद/छुरा  : मामला गरियाबंद जिले के छुरा थाना क्षेत्र का है जहां 2011 में 32 वर्षीय युवा पत्रकार स्व. उमेश राजपूत का उनके निवास पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसे लगभग चार वर्ष तक स्थानीय पुलिस ने जांच की किंतु अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर उनके परिजनों के द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की गई थी जिस पर उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2014 में सीबीआई को यह आदेश किया था कि सीबीआई जितनी जल्द हो इस हत्याकांड की जांच कर सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश करने को कहा गया था। साथ ही याचिकाकर्ता को दस हजार रुपए प्रदान करने राज्य शासन को आदेशित किया था।

किंतु आज आदेश के लगभग दस वर्ष बाद भी उच्च न्यायालय में सीबीआई इस हत्याकांड की जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई है। वहीं थाना छुरा के मालखाने से उमेश राजपूत हत्याकांड से संबंधित कुछ साक्ष्य भी गायब मिले हैं जिन अब तक कुछ कार्यवाही नजर नहीं आती। और नहीं केंद्र सरकार के द्वारा इसमें कोई पहल किया गया और नहीं राज्य सरकार के द्वारा और नहीं क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों के द्वारा आखिर इस हत्याकांड का राज क्या है? आज भी क्षेत्र के हजारों लोगों को इस हत्याकांड के खुलासे का इंतजार है कि उनके अपराधी आखिर है कौन?याचिकाकर्ता के द्वारा कुछ माह पहले सुचना के अधिकार नियम के तहत उच्च न्यायालय में जानकारी मांगी गई तो जानकारी में कहा गया कि अभी जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय में सीबीआई के द्वारा पेश नहीं किया गया है इस लिए उक्त जानकारी अभी प्रदान नहीं की जा सकती है। वहीं आज तक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद याचिकाकर्ता को राज्य शासन द्वारा दस हजार रुपए प्रदान भी नहीं किया गया क्या ये न्यायालय की आदेश की अवहेलना है?

वहीं याचिकाकर्ता उसके भाई को लगभग एक वर्ष पूर्व गोलीमार हत्या करने की धमकी भरा पत्र उनके निवास पर डाला गया जिस पर छुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी लेकिन उसका अपराधी भी अभी तक नहीं पकड़ा जा सका है वहीं याचिकाकर्ता के द्वारा इस घटना के बाद आत्मरक्षा हेतु बंदुक लाईसेंस हेतु जिला प्रशासन में आवेदन लगाया गया है लेकिन अभी तक लाइसेंस की अनुमति प्रदान नहीं हो सका है। जिससे आज़ भी उनके परिजन डर के साये में जिंदगी गुजारने मजबूर हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर पत्रकार उमेश राजपूत के हत्यारों की गिरफ्तारी कब होगी और उनके परिजन कब तक डर के साये में जीवन गुजारने मजबूर रहेंगे? या किसी प्रभावशाली लोगों का हाथ है इस घटना के पीछे या किसी राजनेताओं का?










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