राजनांदगांव : राजनांदगांव शहर की जन-जन की आवाज एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी से यह कहा कि, भाजपा की डबल इंजन की सरकार बनते ही जिस तरह से समाचार पत्रों में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के मुढ़पार में ७००-८०० हाइवा रेत अवैध डम्प करने का मामला समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहा है और एस.डी.एम. उमेश पटेल के तेवर यह अहसास जाता रहे है कि, भाजपा के खनिज मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को अपनी जेब में रखते है? और जिले के खनिज विभाग के मुखिया प्रवीण चंद्राकर तो कम्बल ओड कर इस भरी गर्मी में घी पी रहे है? जहां मोदी जी ने और विष्णुदेव साय जी ने यह कहा कि, भाजपा की डबल इंजन की सरकार बनाओं और सु-शासन पाओं लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री की बातों को अनदेखा जो अधिकारी और खनिज माफिया कर रहे है और आम जनता को लगभग २०,००० रूपये प्रति हाईवा मंहगे दामों में रेत खरीदना पड़ रहा है और जिस तरह से भाजपा के नेता आंख बंद करके भष्ट्र अधिकारी और खनिज माफियाओं को जो बचाने का भरपुर प्रयास कर रहे है? और जिले के कलेक्टर साहब ने जो जांच समिति बनाई है और उसके मुखिया अपर कलेक्टर सी.एल. मारकन्डे साहब को जांच कर रिपोर्ट देने कहाँ है ऐसा समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ है। लेकिन सी.एल. मारकन्डे साहब की औकात नहीं है कि, वह एस.डी.एम. उमेश पटेल और जिला खनिज विभाग के अधिकारियों और अवैध खनिज माफिया के खिलाफ कार्यवाही कर सके क्योंकि पूर्व मेें अनेकों मामले सी.एल. मारकन्डे के कार्यकाल में दफन कर दिये गये है? इसलिए देश के प्रधान मंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी से चाहूगंा की शासनहित और जनहित में दिनांक २० जून और २१ जून २०२४ के समाचारों पत्रों को संज्ञान मे लेते हुए कोई अपने विश्वास पात्र अधिकारियों से इस अवैध रेत के मामले की जांच टीम गठित करवाकर सम्पूर्ण राशि वसुली कर दोषियों के खिलाफ शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करवाई जाये और जब तक इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट का खुलासा नही हो जाता तब तक खनिज विभाग के प्रवीण चंद्राकर और एस.डी.एम. उमेश पटेल को तत्काल हटाने का आदेश जारी करें क्योकि इनके पद में रहते निष्पक्ष जाँच कभी हो ही नहीं सकती? और जिस तरह से भाजपा की सरकार बनते ही चारों तरफ अवैध माफिया खुल के आ गये है जो कि जनहित में उचित नहीं हैं।मो. ९९०७११४४०८
.jpeg)

Comments