छुरिया/राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ प्रदेश में शासकीय विभागों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी के अनेक संगठन है। और सबके अपने-अपने आंकड़े हैं, कई संगठन के आंकड़े तो लाखों में है अगर सभी संगठनों के आंकड़े को जोड़ कर देखा जाए तो यह आंकड़ा लगभग सात लाख से अधिक है। वहीं सरकार की मानें तो यह आंकड़ा कई गुना ज्यादा है। दैनिक वेतन भोगियों द्वारा बताए जा रहे आंकड़े के अनुसार यदि यह आंकड़ा सही भी है तो संगठनों द्वारा बताए आंकड़े के मात्र 7% दैनिक वेतन भोगी, अनियमित कर्मचारी भाई -बहन ही संगठन के प्रदर्शन में शामिल होते रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि दैनिक वेतन भोगियों के विभिन्न संगठनों द्वारा बताए जा रहे आंकड़े सही है या सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़े अगर सरकार के आंकड़े सही माने तो मात्र चालिस के आस पास है।
प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री बिष्णु देव साय जी ने सभी दैनिक वेतन भोगी एवं कर्मचारियों के लिए सचिव स्तर के अधिकारी निहारिका बारिक की अध्यक्षता में कमेटी की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन विभिन्न संगठनों द्वारा बताए जा रहे आंकड़े के लेकर शासन प्रशासन एवं कर्मचारियों के नियमितीकरण और अन्य मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए गए कमेटी के सामने पशोपेश की स्थिति निर्मित हो गई है। वरिष्ठ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हारुन मानिकपुरी ने कहा कि अब अगर सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़े के अनुसार निहारिका कमेटी फैसला लिया तो लाखों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नियमितीकरण के लाभ से वंचित हो जाएंगे। यदि दैनिक वेतन भोगी संगठनों द्वारा बताए जा रहे आंकड़े को माने तो सरकार को संख्या खोजने और दुरुस्त करने में काफी समय लग जाएगा। वरिष्ठ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मानिकपुरी ने आशंका जताई है कि इसी चक्कर में जो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी वर्षों तक शासकीय विभागों कार्य करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी उम्र दराज होने के कगार पर है जिन्हें नियमितीकरण के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। वहीं सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी को भी कार्य करने में असुविधा होगी और कमेटी अपना निर्णय ले भी लेती है तो संगठनों के पदाधिकारी कम लोगों को नियमितीकरण का लाभ मिलेगा कहकर विरोध करने स
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments